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इटली में काम करने का अनुभव: भारतीय युवाओं के लिए नई सीख

इटली में काम कर रहीं ज्योति ने अपने अनुभव को साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि वहां की कार्य संस्कृति भारत से कितनी अलग है। बॉस को 'सर' न कहने से लेकर कॉफी ब्रेक के महत्व तक, ज्योति ने 12 बिंदुओं में अपने अनुभव को साझा किया है। जानें कैसे इटली में काम करने का तरीका भारतीय युवाओं के लिए एक नई सीख बन सकता है।
 

इटली में काम करने का अनुभव


नई दिल्ली: हर साल, भारत से लाखों युवा बेहतर कार्य संस्कृति की खोज में विदेशों का रुख करते हैं। कुछ को अपने सपनों का माहौल मिलता है, जबकि अन्य को ऐसे अनुभव मिलते हैं जो उनकी सोच को बदल देते हैं। ज्योति, जो इटली में काम कर रही हैं, ने अपने पहले दिन ही महसूस किया कि यहां काम करने, समय बिताने और रिश्तों की परिभाषा भारत से पूरी तरह भिन्न है।


ज्योति ने अपने पहले दिन बॉस को 'सर' कहने पर पूरी टीम की हंसी का सामना किया। उन्हें बताया गया कि सीनियर्स को नाम या निकनेम से बुलाना अधिक सामान्य है। शाम 6 बजे के बाद ऑफिस में सन्नाटा छा जाता है और उसके बाद किसी को मैसेज या कॉल करना अनुचित माना जाता है। ज्योति ने अपने अनुभव को 12 बिंदुओं में इंस्टाग्राम पर साझा किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहे हैं।


बॉस को सर कहना मना

ज्योति ने बताया कि भारत में सीनियर्स को 'सर' या 'मैम' कहना सम्मान का प्रतीक है, लेकिन इटली में इसे अजीब माना जाता है। जब उन्होंने बॉस को 'सर' कहा, तो उन्हें निकनेम का उपयोग करने की सलाह दी गई। यह वहां की समानता-आधारित संस्कृति को दर्शाता है, जहां पद से ज्यादा व्यक्ति को महत्व दिया जाता है।


कॉफी का अनोखा कल्चर

इटली के ऑफिस में कॉफी ब्रेक एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब ज्योति ने अपने कप के पैसे देने की कोशिश की, तो मैनेजर ने उन्हें रोक दिया। बताया गया कि जब सीनियर्स मौजूद होते हैं, तो जूनियर्स कॉफी के पैसे नहीं देते। यह वहां की देखभाल करने वाली संस्कृति और टीम-बॉंडिंग का एक हिस्सा है।


माइक्रो-मैनेजमेंट नहीं

इटली में कर्मचारियों के इन-आउट टाइम पर ध्यान नहीं दिया जाता। जब तक काम पूरा हो रहा है, किसी को फर्क नहीं पड़ता कि कौन कब आया। यह भरोसे पर आधारित कार्य संस्कृति का एक उदाहरण है, जहां कर्मचारियों को स्वतंत्रता और जिम्मेदारी दोनों दी जाती हैं।


ब्रेक में काम की बातें नहीं

ब्रेक के दौरान कोडिंग या ऑफिस के काम पर चर्चा करना उचित नहीं माना जाता। जब ज्योति ने कोडिंग पर बात की, तो टीम ने तुरंत चर्चा को छुट्टियों, यात्रा और वीकेंड योजनाओं की ओर मोड़ दिया। यह मानसिक विश्राम और कार्य-जीवन संतुलन का एक तरीका है।


6 बजे के बाद सन्नाटा

जैसे ही शाम 6 बजे, ऑफिस पूरी तरह से खाली हो गया। काम के बाद किसी को मैसेज या कॉल करना अनुचित माना जाता है। कर्मचारियों को विदाई देते समय ऐसा लगता है जैसे वे परिवार से मिलकर जा रहे हों। यह स्वस्थ कार्य सीमाओं का एक उदाहरण है।