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उत्तराखंड में बाघों की सुरक्षा के लिए अग्निवीरों की तैनाती

उत्तराखंड सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए अग्निवीरों की तैनाती का निर्णय लिया है। इस नई टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मॉडल पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके अलावा, AI तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणाली का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार ने वन्यजीव तस्करी पर नियंत्रण के लिए नए अधिकार देने का प्रस्ताव भी रखा है।
 

मुख्य सुरक्षा बल का गठन

नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (TPF) के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस विशेष बल में सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह व्यवस्था कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मॉडल पर आधारित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में कहा कि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने वन्यजीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और संरक्षण कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है।


कॉर्बेट मॉडल पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था

राजाजी टाइगर रिजर्व में बनने वाली टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का मुख्य कार्य बाघों की सुरक्षा करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस मॉडल के लागू होने से शिकार की घटनाओं में कमी आई है। अब इसी व्यवस्था को राजाजी में भी लागू किया जाएगा, जहां वर्तमान में 62 बाघ मौजूद हैं। हाल के वर्षों में बाघों के शिकार की कई घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई।


आधुनिक तकनीक पर जोर

बैठक में वन्यजीव संरक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली, वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों और चारागाहों के विकास तथा वनाग्नि प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। कुंभ-2027 के दौरान निगरानी बढ़ाने के लिए छह हाथियों की रेडियो कॉलरिंग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय भी लिया गया। राजाजी टाइगर रिजर्व के हरिद्वार क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।


वन्यजीव तस्करी पर नियंत्रण

वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। वर्तमान में इस तरह की जानकारी के लिए विभाग को पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था लागू होने से वन्यजीव तस्करी और शिकार से जुड़े मामलों की जांच अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।


मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान दूसरों की जान बचाने वाले साहसी नागरिकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए। साथ ही, वन्यजीव हमलों में मृतक और घायल लोगों के परिजनों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए मानकों के अनुसार कार्रवाई की जाए। सरकार ने 10 जिलों में रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की स्थापना के लिए 16 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र को भेजने और प्रत्येक जिले में प्रबंधन समितियों के गठन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश भी दिए हैं।