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खरगोन के कलेक्टर गुरु प्रसाद का अनोखा स्कूल दौरा

खरगोन के कलेक्टर गुरु प्रसाद ने सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई की। उनका यह अनोखा तरीका न केवल बच्चों की समस्याओं को समझने में मदद करता है, बल्कि शिक्षा में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। 'मिशन बेंचमार्क' के तहत, वह स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। जानें उनके इस दौरे के पीछे की सोच और उद्देश्य।
 

कलेक्टर का स्कूल दौरा


जब लोग कलेक्टर का नाम सुनते हैं, तो उनके मन में अक्सर अधिकारियों की टीम और औपचारिकता की छवि बनती है। लेकिन खरगोन के कलेक्टर आईएएस गुरु प्रसाद ने जब सरकारी स्कूल का दौरा किया, तो उन्होंने एक अलग ही नज़ारा पेश किया। वह बच्चों के बीच जाकर कक्षा की सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गए और एक छात्रा के साथ मिलकर किताब पढ़ने लगे। उन्होंने पढ़ाई से जुड़े सवाल भी पूछे, जिससे उनकी सरलता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।


बच्चों की समस्याओं को समझने का प्रयास

गुरु प्रसाद का उद्देश्य केवल स्कूल की व्यवस्था का निरीक्षण करना नहीं था, बल्कि यह जानना भी था कि बच्चों को पढ़ाई में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खरगोन में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए 'मिशन बेंचमार्क' चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत कलेक्टर ने बच्चों से सीधे संवाद किया, जिससे उनकी सादगी ने सभी को प्रभावित किया।


कक्षा में बच्चों के साथ बैठकर अध्ययन

स्कूल के दौरे के दौरान गुरु प्रसाद ने कक्षा में जाकर सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठकर बच्चों के साथ पढ़ाई की। उन्होंने एक छात्रा के साथ किताब देखी और पढ़ाई से संबंधित सवाल पूछे। उनका यह तरीका सामान्य निरीक्षण से भिन्न था, क्योंकि वह बच्चों के बीच बैठकर उनकी स्थिति को समझने का प्रयास कर रहे थे।


शिक्षा में उत्कृष्टता की कहानी

गुरु प्रसाद 2017 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय में हुई, जिसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक की डिग्री प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के बाद, उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और यूपीएससी के तीन प्रयासों में भारतीय सूचना सेवा, भारतीय राजस्व सेवा और अंततः भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल की।


मिशन बेंचमार्क का उद्देश्य

खरगोन के 49वें कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, गुरु प्रसाद ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी है। 'मिशन बेंचमार्क' का उद्देश्य उन स्कूलों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है, जहां बच्चों के लिए पर्याप्त टेबल और बेंच नहीं हैं। जनभागीदारी के माध्यम से सुविधाएं जुटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई न करनी पड़े।


ग्रामीण और आदिवासी विकास पर ध्यान

खरगोन एक कृषि प्रधान और आदिवासी बहुल जिला है। इसलिए, गुरु प्रसाद की प्राथमिकताओं में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का समग्र विकास भी शामिल है। सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई को समझने का उनका प्रयास इसी सोच को दर्शाता है। एक ओर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां हैं, तो दूसरी ओर बच्चों के साथ सहजता से बैठने का उनका तरीका एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।