बिना डिग्री के नौकरी पाने का नया युग: Google का दृष्टिकोण
बदलती नौकरी की दुनिया
पारंपरिक रूप से, नौकरी के लिए कॉलेज डिग्री को अनिवार्य माना जाता रहा है, लेकिन तकनीकी क्षेत्र में यह धारणा तेजी से बदल रही है। Google जैसी प्रमुख कंपनियाँ अब बिना डिग्री वाले प्रतिभाओं को भी अवसर प्रदान कर रही हैं। यह बदलाव केवल एक ट्रेंड नहीं है, बल्कि कार्य करने के तरीकों में आए महत्वपूर्ण परिवर्तन का परिणाम है।
डिग्री की आवश्यकता में कमी
बर्निंग ग्लास इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, Google में डिग्री आधारित हायरिंग में कमी आई है। 2017 में, 93% जॉब पोस्टिंग में कॉलेज डिग्री की मांग थी, जो 2022 में घटकर 77% रह गई। इसका अर्थ है कि बिना डिग्री वाले उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि हुई है। अब कंपनी उन लोगों को भी अवसर दे रही है जो स्व-शिक्षण के माध्यम से अपनी क्षमताओं को विकसित करते हैं।
सर्गी ब्रिन का संदेश
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, सर्गी ब्रिन ने स्पष्ट किया कि Google कभी भी केवल शैक्षणिक पृष्ठभूमि के आधार पर हायरिंग नहीं करता। उनके अनुसार, कंपनी ने कई ऐसे व्यक्तियों को नौकरी दी है जिनके पास बैचलर डिग्री नहीं थी। ये लोग स्व-शिक्षित हैं और जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, जो आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
AI का प्रभाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने एंट्री-लेवल नौकरियों की प्रकृति को बदल दिया है। कई प्रारंभिक कार्य अब ऑटोमेटेड हो चुके हैं। इस कारण, कंपनियाँ डिग्री से अधिक इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि उम्मीदवार नई तकनीक को कितनी तेजी से सीख सकता है। यही कारण है कि स्किल्स-बेस्ड हायरिंग को बढ़ावा मिल रहा है और औपचारिक डिग्री की आवश्यकताएँ कम हो रही हैं।
ब्रिन की शिक्षा पर दृष्टिकोण
सर्गी ब्रिन ने बताया कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस को अपनी रुचि के कारण चुना था, न कि किसी योजना के तहत। उनके लिए यह निर्णय स्वाभाविक था। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपने इंटरेस्ट के अनुसार सीखता है, तो वह बेहतर प्रदर्शन करता है। यही दृष्टिकोण आज Google की हायरिंग नीति में भी परिलक्षित होता है।
युवाओं के लिए महत्वपूर्ण सलाह
ब्रिन ने छात्रों को सलाह दी कि केवल ऑटोमेशन के डर से करियर का चुनाव न करें। उन्होंने कहा कि AI कुछ क्षेत्रों को बदल सकता है, लेकिन सीखने की क्षमता कभी भी बेकार नहीं होती। यही कारण है कि Google और अन्य बड़ी कंपनियाँ अब डिग्री के बजाय वास्तविक कौशल और प्रायोगिक ज्ञान को प्राथमिकता दे रही हैं।