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बिहार में सहायक अभियंता परीक्षा रद्द, छात्रों में आक्रोश

बिहार में सहायक अभियंता परीक्षा के अचानक रद्द होने से छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया है। युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, आरोप लगाते हुए कि आयोग की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां हैं। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और बार-बार परीक्षा रद्द होने से छात्रों की तैयारी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव भी छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। जानें इस मुद्दे पर छात्रों की चिंताएं और उनकी मांगें।
 

बिहार की परीक्षा प्रणाली पर संकट


पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता एक बार फिर संकट में है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा सहायक अभियंता परीक्षा को अचानक रद्द करने के निर्णय ने हजारों छात्रों को आक्रोशित कर दिया है। सड़कों पर उतरे युवाओं का आरोप है कि आयोग की लापरवाह कार्यप्रणाली और बार-बार होने वाले पेपर लीक ने उनके भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।


परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी

छात्रों का कहना है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। प्रश्नपत्र लीक होना और अन्य अनियमितताएं अब एक सामान्य प्रक्रिया बन गई हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि ये धांधलियां केवल मेहनती छात्रों के अवसरों को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि पूरे तंत्र की ईमानदारी पर भी सवाल उठाती हैं। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों की दूरी भी छात्रों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है।


परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा

छात्रों के बीच व्याप्त सबसे बड़ी नाराजगी परीक्षा के बार-बार रद्द होने को लेकर है। उनका कहना है कि पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन आयोग और सरकार ने स्थायी समाधान निकालने में कोई रुचि नहीं दिखाई। अभ्यर्थियों का मानना है कि इस प्रकार की अनिश्चितता उनकी तैयारी को पूरी तरह बाधित कर देती है।


भ्रष्टाचार के आरोप और जवाबदेही की मांग

आंदोलनकारी छात्रों का मानना है कि आयोग के कुछ अधिकारी इन अनियमितताओं में शामिल हो सकते हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक होना बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। अभ्यर्थियों की मांग है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन इसे रोकने के प्रति गंभीर नहीं है। छात्र अब जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।


आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव

मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए हर परीक्षा एक बड़ी आर्थिक चुनौती होती है। दूर-दराज के केंद्रों तक जाने, वहां ठहरने और यात्रा के खर्च का बोझ उनके परिवारों पर भारी पड़ता है। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनकी मेहनत बेकार जाती है, बल्कि वे मानसिक तनाव और अवसाद का भी शिकार हो रहे हैं। छात्रों का कहना है कि बार-बार की विफलता उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से असुरक्षित बना रही है, जिससे उनका मनोबल टूट चुका है।