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विशाल तिवारी की प्रेरणादायक यात्रा: सरकारी नौकरी की ओर संघर्ष

विशाल तिवारी की कहानी सरकारी नौकरी की तैयारी में संघर्ष और सफलता की प्रेरणा देती है। उन्होंने कई बार असफलता का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। चोट के बावजूद, उन्होंने SSC CGL की तैयारी जारी रखी और अंततः ऑल इंडिया रैंक 74 हासिल की। जानें कैसे उन्होंने अपनी मेहनत और रणनीति से सफलता प्राप्त की।
 

सरकारी नौकरी की तैयारी में संघर्ष


नई दिल्ली: सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा में असफल होना एक सामान्य बात है, लेकिन हर बार खुद को फिर से खड़ा करना आसान नहीं होता। विशाल तिवारी की कहानी इस हिम्मत का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता पाने की कोशिश की, लेकिन कई बार निराशा का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में उनके परिवार में मिठाई बंटी, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था।


इस घटना के बाद उन्हें लोगों की हंसी और तानों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें 13 बार असफलता का सामना करना पड़ा। इस दौरान कंधे में चोट लगने के कारण उन्हें डिफेंस की तैयारी भी छोड़नी पड़ी। हालात कठिन थे, लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी पाने का सपना नहीं छोड़ा। इसके बाद उन्होंने SSC CGL की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी रणनीति में लगातार बदलाव करते रहे।


डॉक्टर की सलाह से मिली नई दिशा

विशाल एक साधारण परिवार से हैं। उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें। उन्होंने NEET की परीक्षा दी और इसके लिए एक साल का ड्रॉप भी लिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से जूलॉजी में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस में जाने की कोशिश की और CDS तथा AFCAT की परीक्षाएं दीं।


इन परीक्षाओं में सफलता के बावजूद, उन्हें पांच बार SSB इंटरव्यू में असफलता मिली। बाद में कंधे में चोट लगने पर डॉक्टर ने उन्हें डिफेंस की तैयारी छोड़ने की सलाह दी। इस मोड़ ने उनके करियर की दिशा बदल दी। अब उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए SSC CGL को अपना लक्ष्य बनाया और तैयारी में जुट गए।


ऑपरेशन टालकर मिली पहली सफलता

असफलताओं के बीच विशाल ने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम किया। चोट के बावजूद, उन्होंने अपना ऑपरेशन टालकर SSC CGL की तैयारी जारी रखने का निर्णय लिया। वर्ष 2022 में उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम सामने आया। उन्होंने SSC CGL में सफलता प्राप्त की और पोस्टल असिस्टेंट का पद हासिल किया।


यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन उन्होंने तैयारी रोकने के बजाय अपनी गलतियों को समझना शुरू किया। इस बार उन्होंने अपनी रणनीति में मॉक टेस्ट को अधिक महत्व दिया। उनका मानना था कि परीक्षा की थ्योरी पर वह पहले ही काम कर चुके थे, इसलिए अब अधिक से अधिक अभ्यास और अपनी गलतियों को पहचानना आवश्यक था।


2023 में मिली सफलता, हासिल की AIR 74

वर्ष 2023 विशाल के लिए निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने लाइब्रेरी में लंबे समय तक पढ़ाई की और मॉक टेस्ट के साथ रिवीजन पर ध्यान केंद्रित किया। पिछली असफलताओं से मिली सीख को उन्होंने अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और SSC CGL में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 74 प्राप्त की।


इस रैंक के साथ उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर यानी ASO का पद मिला। जिस सफर में कभी मिठाई बंटने के बाद भी उनका नाम सूची में नहीं आया था, उसी सफर का अंत एक बड़ी सरकारी नौकरी के साथ हुआ। विशाल की कहानी यह दर्शाती है कि असफलता के बाद की तैयारी कई बार सफलता की दिशा बदल सकती है।