शारदेंदु तिवारी: अमेजन की नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने वाले युवा
एक प्रेरणादायक यात्रा
नई दिल्ली: आज के समय में इंजीनियरिंग के बाद लाखों रुपये की नौकरी पाना युवाओं का एक बड़ा सपना है। लेकिन उत्तर प्रदेश के 27 वर्षीय शारदेंदु तिवारी ने इस सपने से आगे बढ़कर देश की सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने अमेजन में लगभग 46 लाख रुपये के सालाना पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लिया। सेना में भर्ती होने के प्रयास में उन्हें सात बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आठवीं बार सफलता प्राप्त की।
शिक्षा और पृष्ठभूमि
शारदेंदु तिवारी लखनऊ के नीलमथा क्षेत्र के निवासी हैं, जबकि उनका परिवार सुल्तानपुर जिले के पिपरगांव से है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा के चंडीमंदिर स्थित केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त की। 2014 में उन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 93.10 प्रतिशत अंक हासिल किए और 2016 में 12वीं में 79.60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
उच्च शिक्षा की ओर कदम
इसके बाद, उन्होंने पंजाब के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से सूचना प्रौद्योगिकी में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस और सूचना सुरक्षा में एमटेक किया।
अमेजन में करियर
शिक्षा पूरी करने के बाद, शारदेंदु ने तकनीकी क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने अमेजन EC2 में लगभग आठ महीने तक तकनीकी प्रशिक्षु के रूप में काम किया। इसके बाद, उन्होंने Gemini Solutions Pvt Ltd में एक साल तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया और TCS में लगभग तीन साल तक सिस्टम इंजीनियर के रूप में काम किया।
इसके बाद, वह Amazon Web Services में AMS ऑपरेशंस इंजीनियर बने। रिपोर्टों के अनुसार, अमेजन में उनका सालाना पैकेज लगभग 46 लाख रुपये था। हालांकि, कॉर्पोरेट क्षेत्र में अच्छी नौकरी और आकर्षक वेतन होने के बावजूद, उनका लक्ष्य सेना में शामिल होना था।
असफलताओं का सामना
सेना में शामिल होने के लिए शारदेंदु ने कई प्रयास किए। लगातार सात बार असफल होने के बावजूद, उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। अंततः आठवीं कोशिश में उन्हें सफलता मिली। उन्होंने तकनीकी प्रवेश मार्ग के माध्यम से सेना में प्रवेश किया और हाल ही में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया।
प्रेरणा का स्रोत
शारदेंदु के सेना में जाने के निर्णय के पीछे उनके पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके पिता, ऑनरेरी कैप्टन राज कुमार तिवारी, ने रिटायरमेंट से पहले लगभग 36 वर्षों तक आर्मी सर्विस कॉर्प्स में सेवा की। बचपन से पिता को वर्दी में देखकर शारदेंदु के मन में भी सेना में शामिल होने की इच्छा जागृत हुई।
शारदेंदु के लिए सेना केवल एक नौकरी नहीं है, बल्कि यह देश सेवा के साथ-साथ रोमांच और फील्ड सर्विस का अवसर भी है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि यदि किसी का लक्ष्य स्पष्ट हो, तो बड़ी सैलरी और आरामदायक करियर के बावजूद, लगातार असफलताओं के बाद भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।