सुनील और नितेश की हर्बल चाय से 100 करोड़ का सफर
प्रेरणादायक यात्रा:
कई बार एक सफल व्यवसाय की शुरुआत के लिए करोड़ों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक सही विचार और उसे साकार करने का साहस चाहिए। सुनील चंद्र साहा और नितेश सिंह की कहानी भी इसी तरह की है। दोनों की पहली मुलाकात नौकरी के दौरान हुई थी, और इसी दौरान उनके मन में अपना स्टार्टअप शुरू करने का विचार आया। उन्होंने अपनी बचत से एक लाख रुपये नहीं, बल्कि कुल मिलाकर एक लाख रुपये इकट्ठा किए और हर्बल चाय के क्षेत्र में कदम रखा।
100 करोड़ का व्यवसाय
उनका ब्रांड 'ब्लू टी' 2018 में स्थापित हुआ, जो नीलकंठ यानी अपराजिता के फूलों से बनी चाय के लिए प्रसिद्ध है। इस अनोखे उत्पाद ने धीरे-धीरे बाजार में अपनी पहचान बनाई है। अब कंपनी का वार्षिक राजस्व 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इस सफर में न केवल दोनों दोस्तों का व्यवसाय बढ़ा, बल्कि फूल उगाने वाले किसानों को भी नई आय के अवसर मिले।
टीवी सीरियल से मिली प्रेरणा
सुनील चंद्र साहा पश्चिम बंगाल से हैं, जबकि नितेश सिंह उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। उनकी पहली मुलाकात 2011 में चेन्नई में हुई थी। सुनील ने माइक्रोबायोलॉजी और मार्केटिंग की पढ़ाई की है, जबकि नितेश का संबंध रूरल मैनेजमेंट से है। टीवी सीरियल 'पिचर्स' से प्रेरित होकर दोनों ने स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद, सुनील ने एक लेख में बैंगनी रंग के पेय के बारे में पढ़कर इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाशना शुरू किया।
नीलकंठ के फूल बने कारोबार की ताकत
रिसर्च के दौरान, दोनों ने पाया कि दक्षिण-पूर्व एशिया में बटरफ्लाई पी यानी अपराजिता के फूलों से कैफीन-मुक्त चाय बनाई जाती है। उस समय भारत में इस तरह के उत्पाद का बाजार सीमित था। उन्होंने इस अवसर को पहचाना और 2018 में 50-50 हजार रुपये लगाकर ब्लू टी की शुरुआत की। शुरुआत में थाईलैंड से फूल मंगाने में कठिनाई हुई, इसलिए उन्होंने भारत में ही इन फूलों की आपूर्ति का रास्ता खोजा।
किसानों को सिखाई तकनीक
भारत में नीलकंठ के फूल उगते थे, लेकिन किसान आमतौर पर उनका उपयोग धार्मिक कार्यों में करते थे। फूलों को सुखाकर व्यावसायिक उत्पाद बनाने की प्रक्रिया सामान्य नहीं थी। इसलिए, कंपनी ने किसानों को फूल सुखाने और प्रोसेसिंग की तकनीक सिखाई। छोटे और सीमांत किसानों से फूल खरीदने का सिलसिला शुरू हुआ, और कंपनी ने करीब 700 रुपये प्रति किलो की दर से फूल खरीदना शुरू किया। इससे किसानों की मासिक आय 5,000 रुपये से बढ़कर 16 से 17 हजार रुपये तक पहुंच गई।
200 से ज्यादा उत्पादों की श्रृंखला
कंपनी ने शुरुआत में तीन ब्लेंड और पांच प्रकार की हर्ब्स के साथ काम किया। समय के साथ, इसकी उत्पाद श्रृंखला बढ़कर 60 से अधिक हर्ब्स, 30 ब्लेंड और 200 से ज्यादा एसकेयू तक पहुंच गई। उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास एक गांव में लगभग 60 किसान कंपनी के लिए जड़ी-बूटियां उगाते हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों के साथ भी कंपनी का अनुबंध है। ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफार्मों के माध्यम से उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं।
65 करोड़ से 100 करोड़ का लक्ष्य
वित्त वर्ष 2024-25 में ब्लू टी का राजस्व 65 करोड़ रुपये रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ब्रांड अब 80 से 85 करोड़ रुपये के स्तर पर है और अक्टूबर-नवंबर तक 100 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी अपने उत्पाद 11 देशों में बेचती है और अमेरिका में शीर्ष 10 चाय ब्रांडों में स्थान बना चुकी है।