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कपड़ों के साइज सिस्टम का इतिहास और विविधता

कपड़ों के साइज का सिस्टम, जो आज सामान्य प्रतीत होता है, एक दिलचस्प इतिहास रखता है। जानें कि कैसे 19वीं सदी में बड़े पैमाने पर उत्पादन के दौरान S, M, L जैसे साइज विकसित हुए। इस लेख में हम महिलाओं और पुरुषों के साइज में अंतर, विभिन्न देशों में साइज के भिन्नता और ऑनलाइन खरीदारी के लिए उपयोगी सुझावों पर चर्चा करेंगे।
 

कपड़ों के साइज का विकास

कपड़ों पर S, M, L जैसे साइज का सिस्टम आजकल सामान्य प्रतीत होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह प्रणाली कब और कैसे विकसित हुई? इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। पहले के समय में इस तरह के साइज का कोई मानक नहीं था। कपड़े या तो दर्जी द्वारा बनाए जाते थे या फिर घरेलू महिलाएं उन्हें सिलती थीं।


आज के समय में लोग बिना किसी देरी के अपने नाम के अनुसार कपड़े प्राप्त कर लेते हैं, जबकि पहले रेडिमेड कपड़ों का कोई अस्तित्व नहीं था। उस समय दर्जी हर व्यक्ति के लिए उनके शरीर के अनुसार नाप लेते थे, इसलिए S, M, L जैसे साइज की आवश्यकता नहीं थी। जिनके पास दर्जी को पैसे देने की क्षमता नहीं होती थी, वे अपने घर की महिलाओं से कपड़े बनवाते थे।


S, M, L का सिस्टम कैसे शुरू हुआ?

19वीं सदी के अंत में कपड़ों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। यह कहानी लगभग 100-150 साल पुरानी है। अमेरिका में गृहयुद्ध के दौरान यह देखा गया कि इतने सारे सैनिकों के लिए एक समान ड्रेस कैसे बनाई जा सकती है। इस समस्या का समाधान करने के लिए कपड़ों के निर्माताओं ने सैनिकों के शरीर के नाप का एक बड़ा डेटा इकट्ठा किया। उन्होंने पाया कि पुरुषों के शरीर के आकार में कुछ पैटर्न होते हैं। इसी आधार पर पहली बार पुरुषों के साइज को स्मॉल, मीडियम और लार्ज में वर्गीकृत किया गया, जिससे रेडिमेड कपड़ों की शुरुआत हुई।


महिलाओं के कपड़ों का साइज सिस्टम

1930 के दशक तक महिलाओं के कपड़े मुख्यतः दर्जी द्वारा बनाए जाते थे। 1939 में अमेरिकी कृषि विभाग ने लगभग 15,000 महिलाओं के शरीर के 59 हिस्सों का माप लिया ताकि एक मानक साइज स्थापित किया जा सके। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, फैक्ट्रियों में कपड़ों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। हालांकि, हर ब्रांड का साइज भिन्न होता है क्योंकि सभी महिलाओं के शरीर की संरचना अलग होती है।


कपड़ों के साइज में अंतर

कपड़ों के साइज के मामले में दुनिया भर में कोई एक समान मानक नहीं है। हर देश ने अपने लोगों की औसत शारीरिक बनावट और फैशन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार साइज निर्धारित किए हैं। इस कारण से, एक ही व्यक्ति का साइज विभिन्न देशों में भिन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में किसी का साइज "M" हो सकता है, जबकि वही व्यक्ति यूरोप या ब्रिटेन के ब्रांड में किसी अन्य साइज में फिट हो सकता है। महिलाओं के कपड़ों में यह अंतर और भी अधिक स्पष्ट होता है।


इसके अलावा, कई कपड़ा कंपनियां अपने अनुसार साइज निर्धारित करती हैं। यही कारण है कि एक ब्रांड का "Medium" दूसरे ब्रांड के "Medium" से थोड़ा बड़ा या छोटा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऑनलाइन कपड़े खरीदते समय केवल S, M या L पर भरोसा करने के बजाय साइज चार्ट और शरीर की माप को देखना चाहिए। इससे सही फिटिंग वाले कपड़े चुनने में मदद मिलती है और सामान वापस करने की परेशानी भी कम होती है।