लंबे समय तक बैठने के दिमागी स्वास्थ्य पर प्रभाव और बचाव के उपाय
बैठने की आदत और मानसिक स्वास्थ्य
आजकल की तेज़ रफ्तार और व्यस्त जीवनशैली में, अधिकांश लोग अपने डेस्क पर घंटों बिताते हैं, चाहे वह कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल फोन पर काम कर रहे हों। यह आदत भले ही आरामदायक लगे, लेकिन इसका हमारे मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। फोर्टिस हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद के न्यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो शरीर में रक्त संचार धीमा हो जाता है। इससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक बैठने से मस्तिष्क सुस्त हो जाता है और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि लंबे समय तक बैठने से क्या होता है और यह मस्तिष्क पर कैसे असर डालता है।
लंबे समय तक बैठने के प्रभाव
डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, लगातार बैठे रहने से तनाव का स्तर बढ़ता है। कार्य का दबाव, अधिक स्क्रीन समय और शारीरिक गतिविधियों की कमी मस्तिष्क को थका देती है। इससे अवसाद, चिंता और नींद की समस्याएँ हो सकती हैं। जो लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहते हैं, उनमें सकारात्मक सोच और रचनात्मकता में धीरे-धीरे कमी आने लगती है।
बचाव के उपाय
आजकल की जीवनशैली में, लोग व्यायाम के लिए समय नहीं निकालते, बाहरी गतिविधियाँ कम हो गई हैं, और फास्ट फूड का सेवन बढ़ गया है। इन सभी का मिलाजुला असर मस्तिष्क पर नकारात्मक रूप से पड़ता है। मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए केवल दवाएँ ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय जीवनशैली भी आवश्यक है। इस समस्या से बचने के लिए, हर 30-40 मिनट में छोटे ब्रेक लेना, थोड़ी टहलना और कुछ स्ट्रेचिंग करना चाहिए। नियमित योग, प्राणायाम और हल्की व्यायाम मस्तिष्क को तरोताजा रखते हैं। इसके अलावा, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और मोबाइल फोन का कम उपयोग भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।