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Gen Z लड़कियों के लिए एंग्जायटी बैग: तनाव से राहत का नया ट्रेंड

Gen Z की लड़कियों के बीच एंग्जायटी बैग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ये बैग तनाव और घबराहट के समय राहत प्रदान करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं। जानें कैसे एक महिला ने इस ट्रेंड की शुरुआत की और रिसर्च में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं।
 

नई दिल्ली में एंग्जायटी बैग का बढ़ता चलन


नई दिल्ली: Gen Z अक्सर अपने अनोखे व्यवहार और ट्रेंड्स के कारण चर्चा में रहता है। हाल ही में, Gen Z की लड़कियों ने एंग्जायटी बैग को अपने साथ रखना शुरू किया है, और यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


यह बैग विशेष रूप से उन चीजों से भरा होता है जो घबराहट के दौरे के दौरान राहत प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। युवा महिलाएं अब इन बैग्स को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रही हैं।


एंग्जायटी बैग की विशेषताएँ

पश्चिमी देशों में यह ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। जब लोग किसी तनावपूर्ण स्थिति का सामना करते हैं, तो वे तुरंत बैग में रखी चीजों का उपयोग करते हैं। आमतौर पर, इस बैग में दवाएं, हीटिंग या कूलिंग पैड्स, एक पोर्टेबल पंखा और तनाव को कम करने वाले विभिन्न उपकरण शामिल होते हैं।


इस ट्रेंड की शुरुआत कैसे हुई?

एक रिपोर्ट के अनुसार, हन्ना फाउल्स नाम की एक महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई। उन्हें सीने में हलचल महसूस हुई और उनके मन में परेशान करने वाले विचार आने लगे।


उन्हें गर्मी महसूस होने लगी, तब उन्होंने अपने एंग्जायटी बैग का सहारा लिया। यह एक किट थी जिसे उन्होंने Gen Z के इस उभरते ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए तैयार किया था।


उन्होंने अपनी तनाव-राहत की दवा ली और गर्दन पर कंप्रेस लगाया। इसके बाद, उन्होंने अपने पोर्टेबल पंखे का उपयोग किया, जिससे उन्हें काफी राहत मिली। इसके साथ ही, उन्होंने फिजेट खिलौनों का भी सहारा लिया।


राहत मिलने के बाद का अनुभव

कुछ ही समय में, उन्हें नींद आ गई। उन्होंने कहा, 'जब तक मैंने यह बैग नहीं बनाया था, तब तक मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इसकी जरूरत पड़ेगी। इसने मेरी जिंदगी बदल दी है, मैं इसे हमेशा अपने साथ रखती हूं।'


रिसर्च के निष्कर्ष

एक रिसर्च में यह सामने आया है कि 18 से 26 साल के लगभग 1,000 अमेरिकियों में से 61 प्रतिशत ने तनाव महसूस करने की बात कही, जबकि 43 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें महीने में कम से कम एक बार पैनिक अटैक का सामना करना पड़ता है। कई लोग तनाव से निपटने के लिए टॉक थेरेपी और दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन ये उपाय हमेशा तात्कालिक समस्याओं को हल करने में प्रभावी नहीं होते।