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नींद के डेटा से भविष्य की बीमारियों का पता लगाने वाला AI मॉडल

एक नई तकनीक, SleepFM, नींद के डेटा का उपयोग करके भविष्य में संभावित 130 बीमारियों का अनुमान लगाने में सक्षम है। यह AI मॉडल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है और इसे 65,000 व्यक्तियों के नींद डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। जानें कि यह कैसे काम करता है और किस प्रकार की बीमारियों का पता लगा सकता है।
 

नींद के डेटा से स्वास्थ्य का अनुमान


पहले, किसी बीमारी का पता तब चलता था जब स्थिति गंभीर हो जाती थी। लेकिन विज्ञान में प्रगति के चलते, अब यह संभव है कि हम जान सकें कि कौन सी बीमारियाँ हमें प्रभावित कर सकती हैं, उनकी गंभीरता क्या है, और भविष्य में कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित किया है, जिसे SleepFM कहा जाता है, जो नींद के डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति में 130 संभावित बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगा सकता है। यह मॉडल अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा बनाया गया है और इसे 65,000 व्यक्तियों से एकत्रित लगभग 600,000 घंटे के नींद डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। इस अध्ययन के परिणाम मेडिकल जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। आइए जानते हैं कि यह उपकरण कैसे कार्य करता है और यह कैसे भविष्य की बीमारियों का अनुमान लगा सकता है।


SleepFM का कार्यप्रणाली

इस AI प्रणाली को प्रारंभ में नींद से संबंधित सामान्य समस्याओं की पहचान के लिए परीक्षण किया गया, जैसे नींद के विभिन्न चरणों का ट्रैकिंग करना या स्लीप एपनिया की गंभीरता का आकलन करना। इसके बाद, नींद के डेटा को मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के साथ मिलाकर यह देखा गया कि भविष्य में उन्हें किन बीमारियों का खतरा हो सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह मॉडल स्वास्थ्य रिकॉर्ड में मौजूद 1,000 से अधिक बीमारियों में से 130 बीमारियों का सटीक अनुमान लगाने में सक्षम था।


नींद में स्वास्थ्य के संकेत

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्लीप मेडिसिन के प्रोफेसर इमैनुएल मिग्नोट के अनुसार, "नींद के दौरान, शरीर से कई संकेत रिकॉर्ड होते हैं। शरीर की सामान्य गतिविधियों का आठ घंटे तक अध्ययन किया जाता है, जिससे डेटा बहुत समृद्ध हो जाता है।"


डेटा संग्रहण की प्रक्रिया

नींद के विश्लेषण के लिए पॉलीसोम्नोग्राफी का उपयोग किया गया, जो नींद के अध्ययन के लिए सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है। इसमें सेंसर का उपयोग करके कई संकेत रिकॉर्ड किए जाते हैं, जैसे:


दिमाग की गतिविधि
दिल की धड़कन
साँस लेने का पैटर्न
आँखों की हरकत
मांसपेशियों की गतिविधि। SleepFM इन सभी डेटा स्ट्रीम का एक साथ विश्लेषण करता है और उनके आपसी संबंधों को समझता है।


AI प्रशिक्षण की नई विधि

टीम ने AI को प्रशिक्षित करने के लिए 'लीव-वन-आउट' कंट्रास्टिव लर्निंग तकनीक का उपयोग किया। इस विधि में, एक प्रकार के डेटा को जानबूझकर छिपाया जाता है, और AI को बाकी संकेतों के आधार पर गायब जानकारी का अनुमान लगाने की चुनौती दी जाती है। इससे मॉडल की समझ और सटीकता में सुधार होता है।


बीमारियों की पहचान

शोध में पाया गया कि यह AI कई प्रकार की बीमारियों का अनुमान लगाने में विशेष रूप से कुशल है, जिनमें शामिल हैं:


कैंसर
प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याएँ
दिल और रक्त प्रवाह से संबंधित बीमारियाँ
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ। कई मामलों में, इसका C-इंडेक्स स्कोर 0.8 से अधिक था, जो अच्छी अनुमान लगाने की सटीकता को दर्शाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन बीमारियों का खतरा SleepFM केवल एक रात की नींद के डेटा से बता सकता है, उनमें शामिल हैं:


डिमेंशिया
हार्ट अटैक
हार्ट फेलियर
क्रोनिक किडनी रोग
स्ट्रोक
एट्रियल फाइब्रिलेशन। इसके अलावा, यह मॉडल पार्किंसन जैसी बीमारियों और बच्चों में विकास से संबंधित समस्याओं के जोखिम का अनुमान लगाने में भी प्रभावी साबित हुआ है। कुल मिलाकर, यह शोध दर्शाता है कि आपकी नींद केवल थकान दूर करने का एक साधन नहीं है, बल्कि यह आपके भविष्य के स्वास्थ्य का एक दर्पण भी है।