स्कूलों के आसपास जंक फूड पर रोक लगाने की नई पहल
जंक फूड पर रोक लगाने की योजना
केंद्र सरकार बच्चों को जंक फूड से बचाने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) स्कूलों के आसपास उच्च फैट, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
प्रस्ताव का विवरण
इस प्रस्ताव के अंतर्गत, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है, जिनमें निर्धारित मात्रा से अधिक फैट, नमक या चीनी हो। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है और इस पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
प्रभावित खाद्य पदार्थ
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो स्कूलों के आसपास बिकने वाले कई लोकप्रिय खाद्य पदार्थ जैसे चिप्स, मीठे पेय, चॉकलेट, इंस्टेंट नूडल्स, समोसे, बर्गर और पिज्जा शामिल हो सकते हैं।
स्कूलों के आसपास 15 लाख स्थानों पर प्रभाव
इस प्रस्ताव के लागू होने पर देशभर के लगभग 15 लाख स्कूलों के आसपास की दुकानों, रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल पर असर पड़ सकता है। FSSAI का उद्देश्य बच्चों की पहुंच को ऐसे खाद्य पदार्थों से कम करना है, जिन्हें अधिक मात्रा में खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।
FSSAI के अनुसार, दुकानदारों को ऐसे खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति होगी जो निर्धारित HSS मानकों के दायरे में नहीं आते हैं। इसके साथ ही, प्रस्ताव का एक उद्देश्य खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों में फैट, नमक और चीनी की मात्रा कम करने के लिए प्रेरित करना भी है।
सुझावों की मांग
6 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए
FSSAI ने अगस्त में HSS खाद्य पदार्थों में फैट, नमक और चीनी की सीमा निर्धारित करने के लिए प्रस्ताव जारी किया था। इस पर संबंधित पक्षों और आम जनता से 6 अक्टूबर तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
इसका मतलब है कि यह अभी अंतिम नियम नहीं है। सुझावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दुकानदारों की चिंताएं
कारोबार पर असर
कुछ दुकानदारों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता व्यक्त की है। भुवनेश्वर के दुकानदारों का कहना है कि यदि ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई जाती है, तो उनकी बिक्री और आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
व्यापार से जुड़े संगठनों ने नियमों के कार्यान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। Confederation of Indian Food Trade and Industry का कहना है कि कई स्कूल व्यस्त बाजारों में स्थित हैं, जहां दुकानें केवल छात्रों को नहीं, बल्कि आम ग्राहकों को भी सामान बेचती हैं।
महाराष्ट्र का उदाहरण
पहले से लागू व्यवस्था
महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास HSS खाद्य पदार्थों के लिए पहले से सख्त नियम लागू हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, स्कूलों के 50 मीटर के भीतर दुकानों के निरीक्षण के दौरान 133 स्थानों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया।
बच्चों के स्वास्थ्य पर चिंता
मोटापे की समस्या
स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता को कम करने के पीछे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी एक महत्वपूर्ण कारण है। World Obesity Federation के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 19 वर्ष की उम्र के मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 2015 में लगभग 2.8 करोड़ थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 4.1 करोड़ हो जाएगी।
अनुमान है कि यह संख्या 2040 तक लगभग 5.6 करोड़ तक पहुंच सकती है।
2020 में प्रस्ताव
पहली बार चर्चा में
स्कूलों के आसपास HSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक का प्रस्ताव पहली बार 2020 में सामने आया था। हालांकि, अब तक इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है।
फिलहाल, FSSAI का नया प्रस्ताव सुझाव और आपत्तियों की प्रक्रिया में है, इसलिए स्कूलों के आसपास चिप्स, पिज्जा, बर्गर या अन्य HSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की बात कहना सही नहीं होगा।