दूध और मक्खन के रंग का रहस्य: जानें क्यों होता है पीला
दूध और मक्खन का रंग
नई दिल्ली: दूध और दही का रंग सफेद होता है, लेकिन जब बात मक्खन की आती है, तो यह हल्का या गहरा पीला नजर आता है। चाहे घर का बना हो या बाजार में मिलने वाला, मक्खन में पीलेपन का कारण गाय के चारे और दूध में मौजूद प्राकृतिक पिगमेंट है।
पीले रंग का कारण
मक्खन के पीले रंग का मुख्य कारण बीटा कैरोटीन है, जो हरी घास और अन्य हरे पौधों में पाया जाता है। जब गाय हरी घास का सेवन करती है, तो यह पिगमेंट उसके दूध में पहुंचता है और फैट में जमा हो जाता है।
दूध का सफेद रंग
दूध में पानी की मात्रा अधिक होती है, साथ ही इसमें प्रोटीन, फैट और अन्य तत्व भी होते हैं। दूध का सफेद रंग मुख्य रूप से केसिन प्रोटीन के कणों और फैट ग्लोब्यूल्स के प्रकाश के बिखराव के कारण होता है।
हालांकि, दूध में फैट की मात्रा कम होने के कारण बीटा कैरोटीन का पीला रंग स्पष्ट नहीं होता, इसलिए दूध सामान्यतः सफेद दिखाई देता है।
मक्खन का रंग कैसे बदलता है?
जब दूध से क्रीम को अलग किया जाता है और उसे मथा जाता है, तो फैट एकत्र होकर मक्खन का रूप ले लेता है। इस प्रक्रिया में बीटा कैरोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मक्खन का रंग अधिक स्पष्ट हो जाता है।
गायों के दूध से बने मक्खन का रंग हरी घास खाने वाली गायों से अधिक पीला हो सकता है, जबकि अन्य चारे पर निर्भर गायों का मक्खन हल्का रंग का हो सकता है।
मक्खन का रंग भिन्नता
मक्खन का रंग कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे गाय का आहार, नस्ल, मौसम और दूध में फैट तथा बीटा कैरोटीन की मात्रा। हरे चारे वाली गायों के दूध में बीटा कैरोटीन की अधिकता से मक्खन का रंग गहरा हो सकता है।
इसके विपरीत, अनाज या सूखे चारे पर निर्भर गायों का मक्खन हल्का पीला हो सकता है। इसलिए, केवल रंग देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि मक्खन किस प्रकार का है।
बकरी और भेड़ के मक्खन का रंग
बीटा कैरोटीन का उपयोग और भंडारण विभिन्न पशुओं में भिन्न होता है। गाय के दूध में यह पिगमेंट अधिक मात्रा में होता है, जबकि बकरी और भेड़ के दूध से बने मक्खन का रंग अक्सर सफेद होता है।
इस प्रकार, दूध का सफेद रंग और मक्खन का पीला रंग दूध के फैट में मौजूद प्राकृतिक पिगमेंट से संबंधित है। जब दूध को मथकर मक्खन बनाया जाता है, तो बीटा कैरोटीन का रंग अधिक स्पष्ट हो जाता है।