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पांडव बत्ती पौधा: घर में रोशनी लाने वाला अनोखा साथी

पांडव बत्ती पौधा, जिसे महाभारत काल से जोड़ा जाता है, घर में रोशनी लाने का एक अनोखा साधन है। इसकी पत्तियाँ दीये की बाती की तरह जलती हैं और स्वास्थ्य के लिए भी कई लाभ प्रदान करती हैं। जानें इस पौधे की विशेषताएँ, इसके फायदे और इसे घर में कैसे उगाएं।
 

पांडव बत्ती पौधे का परिचय


नई दिल्ली: यदि आपके घर में घी या तेल खत्म हो गया है और बिजली भी चली गई है, तो चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। एक ऐसा पौधा है जिसकी पत्तियाँ दीये की बाती की तरह जलती हैं और पूरे घर को रोशन कर देती हैं। इसे पांडव बत्ती पौधा कहा जाता है। यह पौधा महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि जब पांडवों को 12 वर्षों का वनवास हुआ था, तब उन्होंने इसी पौधे की पत्तियों का उपयोग जंगल में रोशनी के लिए किया था। वे इन पत्तियों पर तेल लगाकर लकड़ी में बांधकर मशाल की तरह जलाते थे। इसी कारण इसका नाम पांडव बत्ती या पांडव पत्ती पड़ा।


पौधे की विशेषताएँ

इस पौधे का वैज्ञानिक नाम कैलिकार्पा टोमेंटोसा (Callicarpa tomentosa) है। यह एक दुर्लभ पौधा है जो भारत के पश्चिमी और पूर्वी घाटों तथा नमी वाले जंगलों में पाया जाता है। विभिन्न स्थानों पर इसे पत्ता बत्ती, कपूर बत्ती और तेलुगू में बोडिगा चेट्टू के नाम से भी जाना जाता है।


इसकी पत्तियों की निचली सतह पर महीन, मखमली और सफेद रोएं होते हैं, जो तेल या घी को आसानी से सोख लेते हैं। यही कारण है कि इसकी पत्तियों का उपयोग दीये में बाती के रूप में किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह पत्तियाँ जलने के बाद तुरंत राख नहीं बनतीं, बल्कि धीरे-धीरे काफी समय तक जलती रहती हैं। इसके अलावा, यह पौधा स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में इसके कई लाभ बताए गए हैं, जैसे सिरदर्द, मसूड़ों को मजबूत करने, चेहरे पर चमक लाने और पाचन शक्ति को सुधारने के लिए इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है।


घर में पांडव बत्ती पौधा कैसे उगाएं

आप इसे अपनी बालकनी में आसानी से उगा सकते हैं। इसके लिए 14 से 16 इंच गहरे मिट्टी के गमले का उपयोग करें, जिसमें पानी निकासी के लिए छेद हो। गमले में 40% सामान्य मिट्टी, 30% वर्मीकम्पोस्ट और 30% रेत या कोकोपीट मिलाकर भरें। पौधे को ऐसी जगह रखें जहां सुबह 3 से 4 घंटे हल्की धूप आती हो। तेज धूप से इसे बचाएं और तभी पानी दें जब ऊपर की मिट्टी सूख जाए। पूजा में उपयोग के लिए इसकी हल्की सूखी पत्तियों को रोल करके तेल में डुबोकर दीये में बाती की तरह जलाएं।