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पित्त की पथरी: कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

पित्त की पथरी एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जो अधिकतर वजन वाले व्यक्तियों और अस्वस्थ खान-पान वाले लोगों में देखी जाती है। यह पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल के संतुलन बिगड़ने से बनती है। इसके लक्षणों में तेज दर्द, जी मिचलाना और पेट में भारीपन शामिल हैं। सही खान-पान और नियमित व्यायाम से इस समस्या से बचा जा सकता है। जानें इसके कारण, लक्षण और उपचार के उपाय इस लेख में।
 

पित्त की पथरी क्या है?


पित्त की पथरी: पित्त की थैली, जिसे गॉलब्लैडर भी कहा जाता है, लीवर के नीचे स्थित एक छोटी थैली है। इसमें पित्त रस होता है, जो भोजन को पचाने में सहायक होता है। कभी-कभी, इस पित्त रस में छोटे कठोर टुकड़े बन जाते हैं, जिन्हें पित्त की पथरी या गॉलस्टोन कहा जाता है। यह समस्या आजकल काफी सामान्य हो गई है, विशेषकर अधिक वजन वाले व्यक्तियों, महिलाओं और अस्वस्थ खान-पान वाले लोगों में।


पित्त की पथरी बनने के कारण

पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल और अन्य तत्व होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। अधिकतर मामलों में, पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से यह जमा होकर पथरी का रूप ले लेता है। कुछ लीवर संबंधी बीमारियों में बिलिरुबिन के बढ़ने से भी पथरी बन सकती है। यदि पित्त की थैली पूरी तरह से खाली नहीं होती है, तो पित्त गाढ़ा होकर पथरी बना सकता है। मोटापा और अस्वस्थ खान-पान भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।


पित्त की पथरी के लक्षण

कई व्यक्तियों में छोटी पथरी होने पर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते। लेकिन जब पथरी किसी नली में फंस जाती है, तो समस्या उत्पन्न होती है। पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में तेज दर्द होना आम लक्षण है, जो पीठ या कंधे तक फैल सकता है। इसके अलावा, जी मिचलाना, उल्टी, खाने के बाद पेट में भारीपन, पेट फूलना और खाना न पचना भी हो सकता है। कभी-कभी बुखार, ठंड लगना या आंखों और त्वचा का पीला पड़ना भी देखा जा सकता है।


पित्त की पथरी की जांच

यदि तेज पेट दर्द के साथ बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आमतौर पर पेट का अल्ट्रासाउंड करवाते हैं, जिससे पथरी की स्थिति और आकार का पता चलता है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य जांच भी की जा सकती हैं।


इलाज और बचाव के उपाय

छोटी और बिना लक्षण वाली पथरी का इलाज कभी-कभी दवाओं से किया जा सकता है। लेकिन बड़ी या समस्या उत्पन्न करने वाली पथरी के लिए अक्सर ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, जिसमें थैली को निकालना होता है। यह प्रक्रिया सुरक्षित मानी जाती है।


बचाव के लिए तला-भुना और अधिक तेल वाला खाना कम करें। फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन का सेवन बढ़ाएं। नियमित व्यायाम करें और वजन को नियंत्रित रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। ये छोटी-छोटी आदतें पथरी के खतरे को काफी कम कर सकती हैं। सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। यदि कोई लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कार्रवाई करें।