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भारत में टाइप 2 डायबिटीज का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

भारत में टाइप 2 डायबिटीज के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे देश एक नए स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। 11 देशों के विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार, भारत अब इस बीमारी का वैश्विक केंद्र बन गया है। अध्ययन में बताया गया है कि खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी इसके मुख्य कारण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इससे बचने के उपाय।
 

भारत में टाइप 2 डायबिटीज का नया केंद्र


नई दिल्ली: भारत से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। 11 देशों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि भारत अब टाइप 2 डायबिटीज का नया वैश्विक केंद्र बन गया है। कुछ दशकों पहले, चीन इस सूची में सबसे ऊपर था, लेकिन जीवनशैली में बदलाव के कारण अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मेटाबॉलिक बीमारियों का यह बढ़ता बोझ न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि लाखों परिवारों की खुशियों को भी छीन रहा है।


भारत की स्थिति में बदलाव

1990 में, टाइप 2 डायबिटीज के सबसे अधिक मामले चीन में थे, जबकि भारत दूसरे स्थान पर था। लेकिन 2023 के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले स्थान पर आ गया है। यह विश्लेषण 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' के डेटा पर आधारित है। अध्ययन के अनुसार, भारत और चीन पर टाइप 2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, उच्च बीएमआई, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी पांच गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों का सबसे भारी बोझ है। शोधकर्ताओं ने 11 देशों के आंकड़ों का गहन अध्ययन किया है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

अध्ययन के लेखक अनूप मिश्रा के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज से होने वाली मौतों के मामले में भारत शीर्ष पर है। हालांकि अन्य बीमारियों में चीन आगे है, लेकिन भारत का दूसरे स्थान पर होना चिंताजनक है। 2023 में अकेले डायबिटीज के कारण देश में 2.1 करोड़ से अधिक मामले और लगभग 5.8 लाख मौतें दर्ज की गईं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश की एक बड़ी आबादी इस साइलेंट किलर की चपेट में है, जिसे तुरंत रोकने की आवश्यकता है।


जीवनशैली और स्वास्थ्य समस्याएं

विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज, मोटापा, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी समस्याएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। इनका मुख्य कारण खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी है। यदि इन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो ये बीमारियां भविष्य में किडनी फेल होना, हार्ट अटैक, लिवर की गंभीर समस्या, लकवा और कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों का आधार बन सकती हैं। आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड का अधिक सेवन इस संकट को और बढ़ा रहा है।


भविष्य की चुनौतियाँ

आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत में टाइप 2 डायबिटीज के 2,13,45,118 मामले और 5,78,367 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, चीन में यह संख्या क्रमशः 1,09,40,382 और 1,72,911 रही। पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डायबिटीज के लगभग 4.9 करोड़ मरीजों में से 54.1 प्रतिशत पुरुष हैं। इस क्षेत्र में उच्च रक्तचाप सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है, जिससे 62.7 लाख मौतें हुई हैं। यह अंतर भारत की कमजोर स्वास्थ्य सुरक्षा और बिगड़ती आदतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।


2030 तक स्थिति और गंभीर हो सकती है

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि 1990 से 2023 के बीच इन बीमारियों के बोझ में 1.7 से 3.7 गुना तक की भारी वृद्धि हुई है। अनुमान है कि 2030 तक यह स्थिति और भी विकराल हो जाएगी। उच्च रक्तचाप आने वाले समय में भी मौत का सबसे बड़ा कारण बना रहेगा। ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में बदलाव और लोगों में जागरूकता लाना अब अनिवार्य हो गया है। स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम ही हमें इस भविष्य के संकट से बचा सकते हैं।