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22 देशों का ईरान के खिलाफ संयुक्त प्रयास, होरमुज की खाड़ी को खुलवाने की कोशिश

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद, 22 देशों ने होरमुज की खाड़ी को फिर से खोलने के लिए एकजुटता दिखाई है। इनमें यूरोपीय और एशियाई देश शामिल हैं, जिन्होंने ईरान की आलोचना की है। इन देशों ने अपील की है कि ईरान धमकियां देना बंद करे और खाड़ी में सुरक्षा सुनिश्चित करे। होरमुज की खाड़ी का महत्व वैश्विक तेल आपूर्ति में है, और भारत की गैस आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

होरमुज की खाड़ी को सुरक्षित करने का प्रयास

नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद, होरमुज की खाड़ी को फिर से खोलने के लिए 22 देशों ने एकजुटता दिखाई है। इनमें अधिकांश यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं, साथ ही खाड़ी क्षेत्र के देश जैसे संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन भी हैं। इन देशों ने ईरान की आलोचना करते हुए कहा है कि उसने खाड़ी को बंद करके गलत और गैरकानूनी कदम उठाया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों का हवाला देते हुए, इन देशों ने ईरान से अपील की है कि वह धमकियां देना बंद करे और खाड़ी में समुद्र में माइंस बिछाने तथा ड्रोन या मिसाइल हमलों को रोक दे। इस बीच, अमेरिका भी होरमुज की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने की योजना बना रहा है।


होरमुज की खाड़ी का महत्व

यह ध्यान देने योग्य है कि होरमुज की खाड़ी से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है, और भारत की लगभग 40 प्रतिशत तेल और गैस इसी मार्ग से आती है। ईरान पर हमले के बाद से यह मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे भारत में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, 22 देशों ने यह स्पष्ट किया है कि वे होरमुज की खाड़ी को फिर से खोलने के लिए प्रयासरत हैं। इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे इस समस्या के समाधान के लिए मिलकर काम करें।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग

होरमुज की खाड़ी को खुलवाने के लिए साझा बयान जारी करने वाले देशों में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश शामिल हैं, साथ ही न्यूजीलैंड भी है। यूरोप के प्रमुख देशों जैसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और नीदरलैंड भी इस बयान में शामिल हैं। इन देशों ने ईरान के द्वारा खाड़ी को रोकने की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।