46 वर्षों से बंद रेलवे फाटक ने ग्रामीणों की जिंदगी को किया प्रभावित
आगरा में बंद रेलवे फाटक की समस्या
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के मिढ़ापुर क्षेत्र में एक रेलवे फाटक पिछले 46 वर्षों से बंद है, जिससे दर्जनों गांवों के हजारों निवासियों का जीवन प्रभावित हो गया है। इस लंबे समय से बंद फाटक के कारण स्थानीय लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ रहा है। निवासियों का कहना है कि यह समस्या कई दशकों से बनी हुई है।
आगरा-बयाना रेलवे लाइन पर स्थित गेट संख्या 62-ए पिछले 46 साल से यातायात के लिए बंद है। इसके बंद होने से मिढ़ाकुर और आसपास के गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया है, जिसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों, किसानों और मरीजों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों और जन प्रतिनिधियों ने रेलवे ओवर ब्रिज या अंडरपास बनाने की मांग तेज कर दी है। गांव वालों का आरोप है कि वे लगभग पांच दशकों से इस मांग को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
हालांकि आगरा में कई अन्य रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है, मिढ़ाकुर के ग्रामीण अभी भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आगरा के अन्य क्षेत्रों में रेलवे बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कार्य जारी है। शाहगंज और नगला छऊआ में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है ताकि जाम की समस्या को हल किया जा सके। रुई की मंडी में लगभग 116 करोड़ रुपये की लागत से अंडरपास का निर्माण हो रहा है, जिससे शाहगंज बाजार की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इसके अलावा, बारा खंभा फाटक पर भी ओवरब्रिज का निर्माण प्रगति पर है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो उन्हें बड़े आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।