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49 पाकिस्तानी श्रद्धालुओं की अटारी-वाघा सीमा से वतन वापसी

49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं का जत्था, जो भारत में ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए आया था, अब अटारी-वाघा सीमा से अपने देश लौट गया है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण उनकी वापसी में कठिनाइयाँ आई थीं, लेकिन गृह मंत्रालय ने उन्हें सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति दी। जानें इस यात्रा की पूरी कहानी और श्रद्धालुओं के अनुभव।
 

पंजाब समाचार


भारत में विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए आए 49 सदस्यीय पाकिस्तानी सिख जत्था गुरुवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने देश लौट गया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से यह सीमा मार्ग बंद था, जिससे उनकी वापसी में कठिनाइयाँ आ रही थीं। गृह मंत्रालय ने अंततः उन्हें सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति दी।


30 अक्तूबर को लौटने की योजना

यह जत्था 8 अक्तूबर को उज्बेकिस्तान एयरवेज के विमान से लाहौर से ताशकंद होते हुए नई दिल्ली पहुंचा था। इसमें 21 पुरुष, 26 महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे। श्रद्धालुओं ने भारत के विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने की योजना बनाई थी। यात्रा समाप्त होने के बाद, उन्होंने 30 अक्तूबर को दिल्ली से ताशकंद होते हुए पाकिस्तान लौटने के लिए महंगी हवाई टिकटें बुक की थीं।


वापसी मार्ग में बदलाव का अनुरोध

हालांकि, वापसी के हवाई मार्ग में बदलाव के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार परमजीत सिंह चंडोक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया।


सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति

इसके बाद, मंत्रालय ने विशेष परिस्थिति में सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति प्रदान की। इससे श्रद्धालुओं को महंगे हवाई सफर के खर्च से राहत मिली है। उन्होंने अपनी हवाई टिकटें सरेंडर कर दी हैं और रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


सरकार के प्रति आभार

जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने इस व्यवस्था के लिए भारत और पाकिस्तान सरकार के साथ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का आभार व्यक्त किया है।