AI वॉइस स्कैम: पुलिस ने दी चेतावनी, रहें सतर्क
AI वॉइस और डीपफेक स्कैम से सावधान रहें
पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने आम जनता को AI वॉइस और डीपफेक स्कैम के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर लोगों की आवाज़ की हूबहू नकल कर ठगी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय सतर्क रहना आवश्यक है।
एसपी मीणा ने बताया कि ठग सोशल मीडिया, वीडियो या ऑडियो क्लिप से किसी व्यक्ति की आवाज़ लेकर AI तकनीक से उसकी आवाज़ का सटीक अनुकरण कर लेते हैं। इसके बाद वे परिजनों, दोस्तों या अधिकारियों के रूप में फोन करते हैं और किसी दुर्घटना या आपात स्थिति का बहाना बनाकर पैसे भेजने का दबाव डालते हैं।
कई मामलों में, अपराधी खुद को किसी वरिष्ठ अधिकारी या रिश्तेदार के रूप में पेश करते हैं, जिससे लोग बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
एसपी मीणा ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी:
- किसी भी फोन कॉल पर केवल आवाज़ सुनकर पैसे ट्रांसफर न करें।
- यदि कोई परिचित पैसे मांगता है, तो पहले उसके मोबाइल नंबर पर कॉल कर सत्यता की पुष्टि करें।
- वीडियो कॉल या किसी विश्वसनीय माध्यम से व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करें।
- किसी भी प्रकार की जल्दबाजी, डर या भावनात्मक दबाव में आर्थिक लेन-देन न करें।
- सोशल मीडिया पर अपनी निजी ऑडियो और वीडियो सामग्री अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से बचें।
- बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
एसपी मीणा ने कहा कि यदि किसी को संदिग्ध कॉल, ऑडियो संदेश या वीडियो प्राप्त होता है, तो उसे तुरंत सत्यता की जांच करनी चाहिए और किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना चाहिए। ऐसी घटनाओं की सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि रेवाड़ी पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन साइबर सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी नागरिकों की जागरूकता और सतर्कता है। आम जनता को सतर्क रहना चाहिए, अफवाहों और भावनात्मक दबाव में नहीं आना चाहिए और किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।