BRICS शिखर सम्मेलन में भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण वार्ता, व्यापार बढ़ाने पर जोर
भारत मंडपम में BRICS शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। इस अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके अलावा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने और पीएम मोदी से बातचीत करने की संभावना भी जताई जा रही है। इसी संदर्भ में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए सदस्य देशों के समक्ष व्यापार को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव
पीयूष गोयल ने BRICS और सहयोगी देशों से आग्रह किया कि वे एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजारों को अधिक खुला बनाएं। उन्होंने व्यापार से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा सामान की आवाजाही को सुगम बनाने पर जोर दिया।
आसान व्यापार नियमों की आवश्यकता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि BRICS भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, जो इस मंच के माध्यम से अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके साथ ही, भारत को वैश्विक 'फार्मेसी' के रूप में भी पहचान मिली है।
गोयल ने यह भी कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार एकतरफा नहीं होना चाहिए। इसके लिए एक ऐसी सप्लाई चेन विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे सभी सदस्य देशों को लाभ हो। उन्होंने कच्चे माल सहित एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की बात की।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा
पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपसी व्यापार को सरल बनाने के लिए सदस्य देशों के भुगतान प्रणाली को एकीकृत करने की संभावनाओं पर काम किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। बेहतर सप्लाई चेन, सरल व्यापार नियम और मजबूत भुगतान प्रणाली से आपसी व्यापार को नई गति मिल सकती है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच BRICS सम्मेलन
BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका की ओर से BRICS समूह, डॉलर और टैरिफ को लेकर कई बार कड़े बयान दिए गए हैं। ऐसे में सदस्य देशों की बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग और वैश्विक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।