CBI ने सुभाष चंद्रा और अन्य के खिलाफ 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया
सुभाष चंद्रा पर धोखाधड़ी का आरोप
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सुभाष चंद्रा और उनके सहयोगियों के खिलाफ एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ लगभग 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया है।
सुभाष चंद्रा, जो एस्सेल समूह के संस्थापक हैं, हाल ही में एक व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में चर्चा में आए थे। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने उन्हें 22,006 करोड़ रुपये के बदले केवल 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में एनसीएलटी की पांच सदस्यीय बैंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने 31 अगस्त को इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसमें सुभाष चंद्रा से संबंधित कंपनियों पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, कदाचार और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। कंपनी का कहना है कि इस धोखाधड़ी के कारण उसे 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 409 और 420 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने बताया कि दो ऋण सुविधाएं सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी पर थीं, जिनमें से एक 500 करोड़ और दूसरी 480 करोड़ रुपये की थी।
कंपनी का आरोप है कि लोन के लिए प्रस्तुत नेट-वर्थ प्रमाणपत्र में सुभाष चंद्रा की कुल संपत्ति 59,113 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि दूसरे प्रमाणपत्र में यह घटकर 40,562 करोड़ रुपये हो गई।
कंपनी ने आगे कहा कि व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा ने इन प्रमाणपत्रों में बताई गई नेटवर्थ से इनकार किया और कहा कि 2024 में उनकी कुल संपत्ति केवल 31.79 करोड़ रुपये थी। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड का आरोप है कि ऋण प्राप्त करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर संपत्ति को दिखाने वाले दस्तावेज तैयार किए गए और पेश किए गए। इसके अलावा, कंपनी ने सुभाष चंद्रा और उनकी कंपनियों पर मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया।