CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी समस्याओं पर शिक्षा मंत्री का बड़ा कदम
नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री का बयान
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया में आई तकनीकी समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने गुरुवार को CBSE मुख्यालय में अधिकारियों के साथ एक बैठक के बाद छात्रों की परेशानियों की नैतिक जिम्मेदारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी व्यक्ति को जानबूझकर इन विसंगतियों के लिए जिम्मेदार पाया गया, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह बोर्ड के अंदर हो या बाहर।
छात्रों की समस्याओं का समाधान
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि कक्षा 12 की परीक्षाओं में शामिल 17 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के 40 करोड़ पन्नों को स्कैन किया गया था। यह CBSE द्वारा पहली बार अपनाई गई 'छात्र-केंद्रित' और पारदर्शी डिजिटल प्रणाली थी, जिसके कारण कुछ तकनीकी और भुगतान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं।
विशेषज्ञों की टीम और सरकारी बैंकों का सहयोग
IIT विशेषज्ञ और सरकारी बैंक संभालेंगे मोर्चा
धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि किसी भी समस्या को अनसुलझा नहीं छोड़ा जाएगा। गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए IIT कानपुर और IIT मद्रास के विशेषज्ञों को सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए शामिल किया गया है। इसके अलावा, पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के दौरान छात्रों को आ रही भुगतान समस्याओं को हल करने के लिए वित्त मंत्रालय की सहायता से चार प्रमुख सरकारी बैंकों (SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक) के भुगतान गेटवे को CBSE पोर्टल से जोड़ा गया है।
राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया
राहुल गांधी 'हताश' और तकनीक विरोधी: प्रधान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने परीक्षा परिणामों में 'भारी अनियमितताओं' का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र न्यायिक जांच और SIT गठन की मांग की थी। उन्होंने तेलंगाना की एक संदिग्ध कंपनी को डिजिटल मूल्यांकन का ठेका देने पर भी सवाल उठाए। इन आरोपों का जवाब देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी को 'हताश' और तकनीकी प्रगति का 'विरोधी' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी का चयन भारत सरकार की पूरी खरीद नीति के तहत किया गया है, जिसकी जानकारी बोर्ड ने पहले ही दी थी। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी पाई गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।