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CJP का आंदोलन: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और सरकार की प्रतिक्रिया

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो CJP संसद की ओर मार्च करने की योजना बना रही है। सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है, जिसमें नए कानून की घोषणा भी शामिल है। जानें इस आंदोलन के पीछे की वजहें और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

CJP का अल्टीमेटम

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते या उन्हें हटाया नहीं जाता, तो CJP संसद की ओर मार्च करने की योजना बना रही है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रवक्ताओं से बातचीत की।


सरकार का रुख

सरकार ने 24 घंटे का समय मांगा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं रखते। सरकार का स्पष्ट रुख है कि किसी भी प्रदर्शनकारी समूह के दबाव में झुकना उचित नहीं है, क्योंकि इससे अन्य समूह भी इसी तरह की मांगें कर सकते हैं।


पेपर लीक के खिलाफ सरकार के कदम

NEET परीक्षा के पेपर लीक के बाद CJP ने आंदोलन शुरू किया। सरकार ने शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है और परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं।


CJP के साथ सहमति के मुद्दे

सरकार ने CJP को सूचित किया है कि 20 जुलाई की घटना के कारण प्रदर्शनकारियों पर FIR नहीं होगी। NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर भी विचार चल रहा है। हालांकि, सरकार 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा नहीं करना चाहती, ताकि यह गलत मिसाल न बने। जिला मजिस्ट्रेट हर परिवार के मामले की देखरेख कर रहे हैं।


नए कानून की पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात एक वीडियो जारी कर पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने की घोषणा की। शुक्रवार को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी। नया बिल पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान करता है। पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने में और ट्रायल 3 महीने में पूरा करने का प्रावधान है। सभी मामलों का निपटारा 5 महीने में किया जाएगा। फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी दर्जा दिया जाएगा। यह बिल सोमवार को संसद में पेश किया जा सकता है।


संसद सत्र पर प्रदर्शनों का प्रभाव

मॉनसून सत्र का पहला हफ्ता लगभग बेकार चला गया है। विपक्ष का कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के बिना NEET मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी। सरकार अब विपक्ष पर दबाव बनाने की योजना बना रही है। सरकार सत्र को चलाना चाहती है, जबकि विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं है। CJP की मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान को हर हाल में इस्तीफा देना चाहिए, जबकि सरकार सख्त कानून बनाने का दावा कर रही है। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।