CJP की धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग, बैठक से पहले कड़ा रुख
CJP का कड़ा रुख
नई दिल्ली: केंद्र सरकार और CJP के बीच 25 जुलाई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले, संगठन ने अपने रुख को और सख्त कर दिया है। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो ऐसी बैठकों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संगठन अपनी आगे की रणनीति पर विचार करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। रांका ने यह भी कहा कि यदि सरकार का दृष्टिकोण नहीं बदलता है, तो संगठन को कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर सरकार को पहले ही एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा जा चुका है, जिसमें परीक्षा प्रणाली में सुधार के कई प्रस्ताव शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री की जवाबदेही
CJP ने एनटीए से जुड़े 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी के मुद्दे पर कहा कि कई पहलुओं की जांच अभी बाकी है। संगठन का मानना है कि परीक्षा से संबंधित मामलों की अंतिम जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री की होती है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि कथित पेपर लीक और उससे जुड़े घटनाक्रमों के कारण छात्रों की आत्महत्या के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, और इसी कारण से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है।
सरकार के साथ बातचीत का तीसरा दौर
शुक्रवार को विठ्ठलभाई पटेल हाउस में CJP प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि संगठन की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास और एक युवा प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह दोनों पक्षों के बीच तीसरी आधिकारिक बैठक थी, जिसमें परीक्षा अनियमितताओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई।
जेपी नड्डा का अगले दौर की बातचीत का संकेत
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि चर्चा लगभग दो घंटे तक चली। उनके अनुसार, CJP ने अपनी तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सुझाव सरकार के सामने रखे। नड्डा ने कहा कि सरकार इन मांगों पर आंतरिक चर्चा करेगी और फिर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक कर उन्हें आगे की जानकारी देगी।
प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
संगठन ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर उनका विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। इसके अलावा, CJP ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तथा कानूनी कार्रवाई वापस लेने की भी मांग की है।