CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों की समीक्षा में केंद्र सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार का संज्ञान
केंद्र सरकार ने CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर ध्यान दिया है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और अन्य भाजपा शासित राज्यों में दर्ज एफआईआर और पुलिस की कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार यह भी देख रही है कि किन मामलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ और किन घटनाओं में हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत
सूत्रों के मुताबिक, जो लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, उनके खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई की संभावना नहीं है। हालांकि, जिन पर हिंसा फैलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अशांति पैदा करने के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर करना है।
FIR वापसी पर विवाद
CJP ने जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं, जिनमें दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग भी शामिल थी। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है, लेकिन CJP का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है।
फिर आंदोलन की चेतावनी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार को मंगलवार तक सभी कानूनी मामलों का ब्योरा साझा करना चाहिए। उनका आरोप है कि बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो संगठन फिर से धरने पर बैठने के लिए मजबूर होगा।
दिल्ली पुलिस की जांच जारी
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस को अभी तक मामलों की वापसी के संबंध में कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है। नई दिल्ली जिले में लगभग 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं। आदेश मिलने पर भी हिंसा की कथित साजिश से जुड़े मामलों की जांच जारी रहेगी।
डिजिटल सबूतों की पड़ताल
जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं ताकि हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। केंद्र की समीक्षा प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नजर है। आने वाले दिनों में एफआईआर की स्थिति और जांच की दिशा इस पूरे विवाद की अगली तस्वीर तय कर सकती है।