भारत में ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी: उपभोक्ताओं के लिए बढ़ता खतरा
ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा
भारत में ऑनलाइन खरीदारी ने उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी को सरल बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही धोखाधड़ी के मामलों में भी वृद्धि हो रही है। कई बार सामान के नाम पर ठगी होती है, तो कभी फर्जी लिंक और संदेशों के माध्यम से लोगों को ठगा जाता है। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन एसोसिएशन (GSMA) की इंडिया कंज्यूमर स्कैम रिपोर्ट 2026 के अनुसार, ऑनलाइन शॉपिंग से संबंधित धोखाधड़ी सबसे आम है। पुरस्कार, लॉटरी और विरासत से जुड़ी ठगी के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं.
सर्वेक्षण के आंकड़े
इंडिया कंज्यूमर स्कैम रिपोर्ट 2026, जो मिलियू इनसाइट द्वारा 29 जुलाई से 3 अगस्त 2026 के बीच किए गए उपभोक्ता सर्वेक्षण पर आधारित है, यह दर्शाती है कि भारतीय उपभोक्ताओं को किस प्रकार के धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 33 प्रतिशत लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े स्कैम का अनुभव किया। इसके बाद इनाम, लॉटरी और विरासत के नाम पर ठगी का प्रतिशत 31 है। नौकरी या कमाई के लालच से ठगी करने वाले स्कैम 30 प्रतिशत हैं, जबकि QR कोड या पेमेंट लिंक के माध्यम से धोखाधड़ी 27 प्रतिशत है।
धोखाधड़ी के तरीके
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि धोखाधड़ी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। 42 प्रतिशत मामलों में मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग किया गया, 37 प्रतिशत में सोशल मीडिया और 33 प्रतिशत में ईमेल का सहारा लिया गया। इसके अलावा, 21 प्रतिशत मामलों में ऑफलाइन QR कोड और पेमेंट लिंक का इस्तेमाल हुआ।
AI का बढ़ता खतरा
भारत में डिजिटल सुविधाओं ने पैसे भेजने, खरीदारी करने और संवाद करने को आसान बना दिया है, लेकिन ठग भी इन सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। सर्वे में शामिल 89 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने ठगी में AI का उपयोग होते देखा है।
AI के उपयोग पर 48 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने AI द्वारा लिखे गए संदेश या बनाई गई नकली तस्वीरें देखी हैं। 47 प्रतिशत ने AI की मदद से बनाई गई नकली प्रोफाइल या विज्ञापन देखे हैं। इसके अलावा, 42 प्रतिशत ने ऐसे वीडियो देखे हैं जिनमें AI की मदद से किसी असली व्यक्ति का नकली वीडियो बनाया गया था।
धोखाधड़ी का शिकार कौन?
रिपोर्ट के अनुसार, 12 प्रतिशत लोग पिछले एक वर्ष में धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, जबकि 39 प्रतिशत ने अपने करीबी लोगों के साथ ऐसा होते देखा है। 72 प्रतिशत लोगों ने माना कि स्कैम के कारण उनका व्यवहार बदल गया है और 42 प्रतिशत को लगता है कि धोखाधड़ी और हैकिंग का खतरा बढ़ रहा है।
इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि अपनी सुरक्षा के लिए 37 प्रतिशत लोगों ने सुरक्षा उपकरण लगाए या अपडेट किए हैं, जबकि 27 प्रतिशत अब कॉल या संदेश पर भरोसा करने के बजाय कंपनी के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करते हैं। केवल 5 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिन्होंने कोई सुरक्षा कदम नहीं उठाया।
स्कैम रिपोर्ट करने के बाद की प्रक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश भारतीय पीड़ित धोखाधड़ी के बाद मदद मांगते हैं। 86 प्रतिशत लोगों ने किसी संगठन से शिकायत की है। इनमें से 49 प्रतिशत ने पुलिस, 41 प्रतिशत ने बैंक या ई-वॉलेट, 40 प्रतिशत ने संबंधित प्लेटफॉर्म और 36 प्रतिशत ने मोबाइल या इंटरनेट सेवा प्रदाता से संपर्क किया। वहीं, 14 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने किसी संगठन से शिकायत नहीं की और 7 प्रतिशत ने किसी को भी इस बारे में नहीं बताया।
इस सर्वे में लगभग 3,500 वयस्क शामिल थे, जिनमें भारत के 500 और आसियान के छह देशों के 3,000 लोग शामिल थे।