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TCS नासिक ब्रांच में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव की गंभीर शिकायतें

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ब्रांच में यौन उत्पीड़न और जबरन इस्लाम थोपने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले की जांच की है और रिपोर्ट में कई सिफारिशें की हैं। कर्मचारियों के डर और उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए, आयोग ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानें इस मामले में अब तक क्या हुआ है और महिला आयोग की रिपोर्ट में क्या कहा गया है।
 

TCS नासिक ब्रांच में उत्पीड़न की घटनाएं

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का नासिक कार्यालय हाल ही में यौन उत्पीड़न और जबरन इस्लाम थोपने के आरोपों के चलते चर्चा में है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस कार्यालय के विषाक्त माहौल पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां महिलाओं के साथ लगातार यौन शोषण हो रहा था और धार्मिक भावनाओं का अपमान किया जा रहा था।


महिला आयोग ने यह भी बताया कि शिकायतों के बावजूद कंपनी के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे कर्मचारियों में डर का माहौल बना रहा और वे अपनी बात रखने में असमर्थ रहे।


धार्मिक उत्पीड़न की घटनाएं

आयोग ने यह चिंता भी जताई कि युवा और 'जेन जी' कर्मचारी भी इस उत्पीड़न का शिकार हुए। उनके खिलाफ धार्मिक टिप्पणियां की गईं और उन पर दबाव डाला गया।


मामले की प्रगति

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के आरोप शामिल हैं। पुलिस ने 9 संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया है।


महिला आयोग की जांच

राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन किया था। इस कमिटी ने 18 से 19 अप्रैल के बीच नासिक जाकर पीड़ितों, पुलिस और TCS के अधिकारियों से बातचीत की। इस जांच के आधार पर 50 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें 25 सिफारिशें की गईं। यह रिपोर्ट 8 मई को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सौंपी गई।


रिपोर्ट में प्रमुख बिंदु

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी TCS नासिक का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले चुके थे और वे युवा और कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते थे। महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, मानसिक और भावनात्मक शोषण किया जाता था। इसके साथ ही हिंदू धर्म की आस्था को नीचा दिखाने वाली बातें की जाती थीं।


कर्मचारियों का डर

कर्मचारियों में इतना डर था कि कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता था। जो बोलते थे, उन्हें नौकरी से निकालने या ट्रांसफर करने की धमकी दी जाती थी। रिपोर्ट में HR हेड पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने इन गलत कामों को बढ़ावा दिया।


महिला आयोग की सिफारिशें

महिला आयोग ने सिफारिश की है कि POSH कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, कंपनी में एक मजबूत HR सिस्टम और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। शिकायत करने वालों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और कार्यस्थल की सुरक्षा की नियमित निगरानी की जाए।


निदा खान की न्यायिक हिरासत

आरोपी निदा खान को 24 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।