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एच-1बी वीजा में बदलाव का प्रस्ताव: अमेरिकी सांसद का नया विधेयक

अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। इस विधेयक में ग्रीन कार्ड के विकल्प को समाप्त करने और विदेशी छात्रों के लिए काम करने की अनुमति देने वाले कार्यक्रम को खत्म करने की मांग की गई है। चिप रॉय का कहना है कि यह कदम अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह विदेशी तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना और रहना कठिन बना सकता है।
 

एच-1बी वीजा कार्यक्रम में प्रस्तावित बदलाव

अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के एक कट्टरपंथी सांसद ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण संशोधन लाने वाला एक विधेयक संसद में पेश किया है। इस विधेयक में एच-1बी वीजा को ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के विकल्प को समाप्त करने का प्रस्ताव है। चिप रॉय, जो टेक्सास से सांसद हैं, ने इसे अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट के नाम से प्रस्तुत किया।


विदेशी छात्रों के लिए नई चुनौतियाँ

इस विधेयक में विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देने वाले ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OTP) कार्यक्रम को समाप्त करने की भी मांग की गई है। चिप रॉय का कहना है कि पिछले चार दशकों में एच-1बी वीजा का दुरुपयोग हुआ है, जिससे नियोक्ता अमेरिकी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) कर्मचारियों को नजरअंदाज कर सस्ते विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता देने लगे हैं।


चिप रॉय की सख्ती का कारण

चिप रॉय का मानना है कि अब लॉटरी प्रणाली को समाप्त कर एक नई प्रणाली लागू करने का समय आ गया है, जिसमें योग्यता को प्राथमिकता दी जाए और सही वेतन मानक लागू हों। यह विधेयक उस समय पेश किया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कानूनी प्रवासन नियमों को सख्त कर रहा है।


विधेयक की प्रमुख बातें

इस विधेयक के अनुसार, एच-1बी आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे वहां लौटने का इरादा रखते हैं। इसके अलावा, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबित होने पर एच-1बी की अवधि बढ़ाने की मौजूदा सुविधा भी समाप्त कर दी जाएगी। प्रस्तावित कानून में एच-1बी वीजा की अधिकतम अवधि 6 साल से घटाकर 2 साल करने और लॉटरी की जगह अधिक वेतन वाली नौकरियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।


एच-1बी वीजा की परिभाषा

एच-1बी अमेरिका का एक विशेष वीजा है, जिसके माध्यम से कंपनियां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के पेशेवरों को उच्च कुशल नौकरियों के लिए आमंत्रित करती हैं। यह मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में उपयोग होता है। इसकी मांग बहुत अधिक है, जिसके कारण हर साल लॉटरी के माध्यम से वीजा आवंटित किए जाते हैं।


विधेयक के संभावित प्रभाव

यदि यह विधेयक पारित होता है, तो एच-1बी वीजा को अस्थायी कार्य वीजा के रूप में स्थापित किया जाएगा, न कि अमेरिका में स्थायी निवास का साधन। इसके लागू होने पर विदेशी तकनीकी पेशेवरों, विशेषकर भारतीयों के लिए अमेरिका में काम करना और रहना काफी कठिन हो जाएगा।