दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने की केंद्र सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार की कार्रवाई
दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाना शुरू कर दिया है। इस संदर्भ में भूमि एवं विकास कार्यालय के एस्टेट ऑफिसर के पास एक शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें क्लब को जमीन से बेदखल करने की मांग की गई है। सरकार का कहना है कि सफदरजंग रोड पर स्थित जिमखाना की 27.3 एकड़ भूमि रक्षा अवसंरचना, सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य जनहित परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।
क्लब का मालिकाना हक
सरकार ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यह भूमि एक सार्वजनिक परिसर है और इसका स्वामित्व भारतीय संघ के पास है। केंद्र ने बताया कि यह संपत्ति 1928 में तत्कालीन इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड को स्थायी पट्टे के तहत दी गई थी। हालांकि, पट्टे के खंड 4 के अनुसार, यदि सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि की आवश्यकता होती है, तो वह पुनः कब्जा लेने का अधिकार रखती है।
'क्लब का अवैध कब्जा'
क्लब का अवैध कब्जा
केंद्र ने अपनी याचिका में कहा है कि पट्टे के समाप्त होने के बाद क्लब का परिसर पर कब्जा अवैध है। सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदार बेदखल करना) अधिनियम- 1971 की धारा 2(G) के तहत दिल्ली जिमखाना क्लब अनधिकृत कब्जेदार की श्रेणी में आता है, और इसके अनुसार इसे बेदखल किया जाना चाहिए।
पट्टा समाप्ति का नोटिस
राष्ट्रपति द्वारा पट्टा समाप्त किया गया
केंद्र ने अपनी शिकायत में बताया कि राष्ट्रपति ने भूमि एवं परिवहन विभाग के माध्यम से 22 मई को एक नोटिस जारी कर पट्टा समाप्त कर दिया था। क्लब को 5 जून तक कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। पट्टा समाप्त होने के बाद भी क्लब का कब्जा बना हुआ है। सरकार का कहना है कि यह संपत्ति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और राजधानी के संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। केंद्र ने दिल्ली जिमखाना क्लब को अनधिकृत कब्जेदार घोषित करने और उसे संपत्ति से बेदखल करने की मांग की है।