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नोएडा के साइकिल ट्रैक: एक सपना जो अधूरा रह गया

नोएडा में साइकिल ट्रैक की स्थिति चिंताजनक है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में शुरू हुए ये ट्रैक अब पार्किंग और अन्य उपयोगों में तब्दील हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक का उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि नोएडा अथॉरिटी इस पर चुप्पी साधे हुए है। क्या यह साइकिल ट्रैक एक अधूरा सपना बनकर रह गया है? जानें पूरी कहानी में।
 

अखिलेश यादव का चुनावी मोड

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर चुनावी गतिविधियों में सक्रिय हैं। 2012 के चुनावों से पहले साइकिल चलाने वाले यादव ने सत्ता में आने के बाद भी साइकिल चालकों का ध्यान रखा। लखनऊ सहित कई शहरों में साइकिल चलाने के लिए विशेष ट्रैक बनाए गए थे। अब लगभग एक दशक बाद, इन ट्रैकों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। नोएडा में बने साइकिल ट्रैक की हालत ऐसी है कि साइकिल चलाने वाले अब सड़क पर चलने के लिए मजबूर हैं।


साइकिल ट्रैक का उद्देश्य

2012 में समाजवादी पार्टी के शासन में, 2014-15 में साइकिल ट्रैक का निर्माण शुरू हुआ। नोएडा में विभिन्न सेक्टरों में लगभग 42 किलोमीटर लंबे ट्रैक बनाए गए थे, जिसमें करीब 40 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कहा था कि इन ट्रैकों का निर्माण पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया गया था।


साइकिल ट्रैक की वास्तविकता

हालांकि, नोएडा में साइकिल ट्रैक की स्थिति चिंताजनक है। कई स्थानों पर ट्रैक का उपयोग पार्किंग के लिए किया जा रहा है, जिससे साइकिल चालकों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक की चौड़ाई और कनेक्टिविटी भी समस्याएं पैदा कर रही हैं।


स्थानीय लोगों की राय

स्थानीय निवासी घनश्याम मिश्र ने बताया कि वह पिछले दो साल से इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन ट्रैक पर अक्सर बाइक और कारें खड़ी रहती हैं। उन्होंने कहा कि अगर ट्रैक को ठीक से बनाया जाए तो वह इसका उपयोग जरूर करेंगे।


नोएडा अथॉरिटी की चुप्पी

नोएडा अथॉरिटी से इस मामले पर प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। अधिकारियों ने मीडिया से बात करने से इनकार किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर कोई गंभीरता नहीं है।


साइकिल ट्रैक का भविष्य

अखिलेश यादव का यह प्रोजेक्ट अब एक अधूरा सपना बनकर रह गया है। सरकार बदलने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे ट्रैक की स्थिति बिगड़ गई है। अब नोएडा में साइकिल चलाने वाले लोग तो हैं, लेकिन उनके लिए बनाए गए ट्रैक पर अन्य वाहनों का कब्जा है।