☰
×

फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सौदा: भारत का रक्षा निर्यात एक नई ऊंचाई पर

भारत और फिलीपींस के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की अतिरिक्त खरीद पर बातचीत अंतिम चरण में है। इस सौदे के तहत फिलीपींस लगभग 60 मिसाइलें प्राप्त कर सकता है, जिसकी अनुमानित लागत 70 से 80 करोड़ डॉलर है। यह घटनाक्रम फिलीपींस की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने और दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ तनाव के बीच महत्वपूर्ण है। भारत के लिए, यह सौदा केवल हथियारों की बिक्री नहीं, बल्कि क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी बढ़ावा देने का अवसर है। जानें इस सौदे के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद पर बातचीत अंतिम चरण में


भारत के रक्षा निर्यात को एक नया अवसर मिल रहा है, क्योंकि फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की अतिरिक्त खरीद पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस समझौते के तहत, दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लगभग 60 मिसाइलें प्राप्त कर सकता है, जिसकी अनुमानित लागत 70 से 80 करोड़ डॉलर के बीच है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब फिलीपींस अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते तनाव ने भी मनीला की रक्षा तैयारियों को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत के लिए, यह सौदा केवल हथियारों की बिक्री नहीं है, बल्कि क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी बढ़ावा देने का एक अवसर है।


60 मिसाइलों की खरीद की योजना

रिपोर्टों के अनुसार, इस संभावित समझौते के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों ने संकेत दिया है कि फिलीपींस लगभग पांच ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों की खरीद में रुचि रखता है। भारत के दो सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित ऑर्डर में लगभग 60 मिसाइलें शामिल हो सकती हैं। इससे पहले, दोनों देशों के बीच 2022 में 375 मिलियन डॉलर का एक समझौता हुआ था, और भारत उस अनुबंध के तहत मिसाइलों की आपूर्ति कर रहा है। अब अतिरिक्त खरीद की संभावना दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत कर सकती है।


राष्ट्रपति मार्कोस की दिलचस्पी

फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आर्सेनियो एंडोलोंग ने बताया कि राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने ब्रह्मोस मिसाइलों की संख्या बढ़ाने में रुचि दिखाई है। हालांकि, उन्होंने नए समझौते की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो थियोडोरो ने भी इस दिशा में अपने देश की मंशा जाहिर की है। दिल्ली डिफेंस डायलॉग में वर्चुअल संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि मनीला और अधिक ब्रह्मोस यूनिट हासिल करना चाहता है।


दक्षिण चीन सागर में तनाव का प्रभाव

फिलीपींस समुद्री क्षेत्रों की निगरानी और अपनी तटीय सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत करने में जुटा है। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों को लेकर चीन के साथ उसका विवाद लगातार चुनौती बना हुआ है। पिछले वर्षों में विवादित समुद्री इलाकों में दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे हालात में लंबी दूरी तक मार करने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणाली फिलीपींस की रक्षा रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।


ब्रह्मोस की महत्वता

भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल प्रणालियों में से एक मानी जाती है। इसकी विशेषता यह है कि इसे जमीन आधारित प्लेटफॉर्म, युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान इस मिसाइल प्रणाली को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ी थी।


भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात

भारत अब घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने रक्षा उपकरणों की पहुंच बढ़ा रहा है। जुलाई में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, वियतनाम के साथ भी इस प्रणाली को लेकर समझौता हुआ है। कई अन्य देशों के साथ भी भारत की बातचीत जारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात 384.24 अरब रुपये यानी लगभग 4.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।