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भारत में अनुसंधान और विकास: चुनौतियाँ और संभावनाएँ

भारत में अनुसंधान और विकास की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी है। नीति आयोग की रिपोर्ट में प्रशासनिक जटिलताओं और फंडिंग की कमी को प्रमुख बाधाएँ बताया गया है। जानें कि कैसे भारत को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुधार की आवश्यकता है और क्या सिफारिशें की गई हैं।
 

भारत की तकनीकी स्थिति

क्या आपने एनवीडिया, अल्फाबेट, गूगल, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट या अमेजन के बारे में सुना है? ये सभी विश्व की प्रमुख तकनीकी कंपनियाँ हैं, लेकिन इनमें से कोई भी भारत की नहीं है। टेनसेंट, अलीबाबा, हुवावे, बाइटडांस, शाओमी, सीएटीएल और लेनेवो जैसे ब्रांड भी हैं, लेकिन इनका भी भारत से कोई संबंध नहीं है। अमेरिका, चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के मुकाबले हम काफी पीछे हैं, जहाँ ये देश हमसे विज्ञान और तकनीक से जुड़े उपकरण नहीं खरीदते, बल्कि हम उनके खरीदार हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा भारतीय व्यापार से आता है।


भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा

यह नहीं है कि भारतीय वैज्ञानिकों में प्रतिभा की कमी है या हमारे शैक्षणिक संस्थान अच्छे छात्रों को तैयार नहीं कर रहे हैं। अल्फाबेट और गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, जबकि सत्या नडेला, माइक्रोसॉफ्ट के CEO, ने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शिक्षा प्राप्त की है।


नीति आयोग की रिपोर्ट

नीति आयोग ने 2026 में 'ईज ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इन इंडिया' नामक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट वैज्ञानिकों, संस्थान प्रमुखों, उद्योग जगत और नीति विशेषज्ञों के साथ व्यापक बातचीत पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास युवा प्रतिभा और ज्ञान उत्पादन की क्षमता है, लेकिन प्रशासनिक जटिलताएँ, फंडिंग की कमी और प्रक्रियागत बाधाएँ इस क्षमता को पूरी तरह से विकसित करने में रुकावट डाल रही हैं।


फंडिंग की कमी

भारत उन क्षेत्रों में अच्छा कर रहा है जहाँ संसाधनों की आवश्यकता कम है, लेकिन बौद्धिकता की अधिकता है। भारत अनुसंधान में बेहतर है, पेटेंट में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, और ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद चौथे स्थान पर है। हालाँकि, भारत का ग्रॉस एक्सपेंडीचर ऑन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट (GRED) GDP का केवल 0.65 प्रतिशत है।


अन्य देशों की तुलना

अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में भारत का GRED बहुत कम है। अमेरिका का GRED GDP का 3.5 प्रतिशत है, जबकि चीन 2.4 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया 4.5 प्रतिशत खर्च करता है।


भारत में रिसर्च और डेवलेपमेंट की स्थिति

भारत में रिसर्च और डेवलेपमेंट का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा सरकारी स्रोतों से आता है। प्राइवेट और परोपकारी संस्थाओं का योगदान सीमित है। प्रीमियर संस्थानों को 80 प्रतिशत से अधिक फंडिंग मिलती है, जबकि छोटे संस्थान फंडिंग के लिए संघर्ष करते हैं।


सुधार की आवश्यकता

नीति आयोग की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को अनुसंधान और विकास में सुधार के लिए नियमों को लचीला बनाना होगा। वैज्ञानिकों को फाइलों और ऑडिट में समय बर्बाद करने के बजाय अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।


चुनौतियाँ

भारत में फंडिंग की प्रक्रिया जटिल है, और फंड रिलीज में देरी आम है। इसके अलावा, वैज्ञानिक उपकरणों की कमी और अनुसंधान के लिए समय की कमी भी एक बड़ी समस्या है।


नीति आयोग की सिफारिशें

नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि सरकार को GRED में वृद्धि करनी चाहिए और इसे GDP का कम से कम 2 प्रतिशत बनाना चाहिए। इसके अलावा, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम को सुधारने और फंडिंग प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है।