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भारत में औसत लंबाई में गिरावट: स्वास्थ्य और पोषण की चुनौती

भारत में औसत लंबाई में गिरावट की चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जो बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दर्शाती है। हाल के अध्ययनों में भारतीय पुरुषों और महिलाओं की औसत ऊंचाई में गिरावट देखी गई है, जबकि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में सुधार हुआ है। यह स्थिति केवल शारीरिक विकास का मामला नहीं है, बल्कि यह देश में स्वास्थ्य और पोषण की बड़ी चुनौतियों को भी उजागर करती है। जानें इस विषय पर और क्या खुलासा हुआ है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
 

भारतीयों की औसत लंबाई में चिंताजनक गिरावट

एक समय था जब भारतीय लोग चीनी सैनिकों का मजाक उनकी कम ऊंचाई के कारण उड़ाते थे, लेकिन अब हालात बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। भारत में आर्थिक प्रगति, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बावजूद, औसत लंबाई को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है। पिछले सौ वर्षों में कई देशों में लोगों की औसत ऊंचाई में तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि भारत और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि काफी धीमी रही है। कुछ अध्ययनों में तो औसत ऊंचाई में गिरावट भी देखी गई है.


अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति

चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने पिछले कुछ दशकों में अपने नागरिकों की औसत ऊंचाई में उल्लेखनीय सुधार किया है, जबकि भारत में यह वृद्धि काफी धीमी रही है। कुछ आयु वर्गों में औसत ऊंचाई में गिरावट भी देखी गई है। यह केवल शारीरिक विकास का मामला नहीं है, बल्कि यह बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और जीवन स्तर से जुड़ी बड़ी चुनौतियों को भी दर्शाता है.


रिसर्च में क्या खुलासा हुआ?

2021 में PLOS ONE जर्नल में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में 2005-2006 से 2015-2016 के बीच 15 से 25 साल के भारतीय पुरुषों की औसत ऊंचाई में लगभग 1.10 सेंटीमीटर की गिरावट पाई गई। वहीं, 26 से 50 साल के पुरुषों की औसत ऊंचाई में लगभग 0.86 सेंटीमीटर की कमी देखी गई.


महिलाओं की औसत लंबाई में क्या बदलाव आया?

महिलाओं के मामले में स्थिति थोड़ी भिन्न थी। 15 से 25 साल की महिलाओं की औसत ऊंचाई में मामूली गिरावट देखी गई, जबकि 26 से 50 साल की महिलाओं में हल्का सुधार हुआ। विशेष रूप से, सबसे गरीब परिवारों की महिलाओं और अनुसूचित जनजाति की युवा महिलाओं में गिरावट अधिक थी.


लंबाई में कमी के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबाई को प्रभावित करने में आनुवंशिकता के साथ-साथ बचपन का पोषण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलने पर बच्चे अपनी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार लंबाई हासिल नहीं कर पाते। प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक और विटामिन की कमी हड्डियों और मांसपेशियों के विकास को प्रभावित कर सकती है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में लंबे समय तक कुपोषण रहने पर स्टंटिंग की समस्या उत्पन्न होती है, जो भारत में अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है.


खराब खानपान और संक्रमण का प्रभाव

बच्चों की लंबाई पर केवल भोजन की कमी ही नहीं, बल्कि भोजन की गुणवत्ता भी असर डालती है। कई परिवारों में बच्चों को पर्याप्त भोजन तो मिलता है, लेकिन उसमें प्रोटीन और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है। बार-बार दस्त, संक्रमण, पेट से जुड़ी बीमारियां और साफ पानी की कमी भी पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करती हैं. इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं का कमजोर स्वास्थ्य और जन्म के समय बच्चे का कम वजन भी उनके शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.


भारत की तुलना में चीन और दक्षिण कोरिया की प्रगति

दुनिया भर में बच्चों की लंबाई पर किए गए अध्ययनों में चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में काफी सुधार देखा गया है। 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन में 1985 से 2019 के बीच 200 से अधिक देशों के बच्चों और किशोरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें चीन में 19 साल के लड़कों की औसत ऊंचाई में लगभग 8 सेंटीमीटर की वृद्धि देखी गई। दक्षिण कोरिया में भी बच्चों और किशोरों की औसत ऊंचाई में बड़ा सुधार हुआ है। इसके पीछे बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, जीवन स्तर और बच्चों की देखभाल में आए बदलाव महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं. भारत के लिए यह संकेत है कि केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसका लाभ बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य तक पहुंचना आवश्यक है.