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भारत में कार सुरक्षा के लिए नए नियम: जानें क्या बदलने वाला है

भारत के सड़क परिवहन मंत्रालय ने कारों की सुरक्षा के लिए नए और कड़े नियमों की घोषणा की है। इन नियमों में इमोबिलाइजर और इवेंट डेटा रिकॉर्डर जैसे उपकरणों का अनिवार्य होना शामिल है। नए मानकों का उद्देश्य न केवल कारों की सुरक्षा को बढ़ाना है, बल्कि पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित करना है। ये नियम 2027 से 2032 के बीच लागू होंगे, जिससे कार कंपनियों को तैयारी का समय मिलेगा। जानें इन बदलावों के बारे में विस्तार से।
 

सड़क परिवहन मंत्रालय के नए सुरक्षा नियम

भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कारों की सुरक्षा को लेकर कई पुराने नियमों में बदलाव करते हुए नए और कड़े मानक स्थापित किए हैं। अब कार निर्माताओं को सुरक्षा से संबंधित नए मानकों के अनुसार अपनी गाड़ियों का निर्माण करना होगा। नए नियमों के अंतर्गत, सामने, बगल और पीछे से टकराने की स्थिति में ईंधन प्रणाली और बैटरी की सुरक्षा के लिए नए मानक लागू किए जाएंगे। इसके साथ ही, गाड़ी की टक्कर से पैदल चलने वालों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को होने वाले नुकसान से संबंधित मानकों में भी बदलाव किया गया है.


चोरी रोकने के उपाय और दुर्घटना जांच उपकरण

इसके अतिरिक्त, कारों में चोरी को रोकने के लिए इमोबिलाइजर लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, दुर्घटनाओं की जांच के लिए हवाई जहाज के ब्लैक बॉक्स के समान एक उपकरण, जिसे इवेंट डेटा रिकॉर्डर कहा जाता है, भी लगाना आवश्यक होगा। ये नियम धीरे-धीरे 2027 से 2032 के बीच लागू होंगे, जिससे कार कंपनियों को तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा.


नए नियमों के तहत क्या बदलाव होंगे?

M1 श्रेणी की कारों में 1 अक्टूबर 2027 से इमोबिलाइजर लगाना अनिवार्य होगा। यह उपकरण सुनिश्चित करता है कि सही चाबी के बिना कार चालू नहीं हो सके। नए नियमों में इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर (EDR) को भी शामिल किया गया है, जो सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को रिकॉर्ड करता है। यह उपकरण दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाने में मदद करता है.


पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर ध्यान

नए नियमों में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। नए वाहन मॉडलों पर इससे संबंधित नियम 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे। नए नियमों के अनुसार, पैदल यात्रियों के लिए फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर (FlexPLI) परीक्षण उपकरण का उपयोग 1 अक्टूबर 2032 से अनिवार्य होगा. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुर्घटनाओं के बाद की जांच के बजाय, टकराने के समय गाड़ी में बैठे लोग और सड़क पर चलने वाले लोग दोनों सुरक्षित रहें.


नए नियमों के लागू होने की समयसीमा

नए सुरक्षा मानक एक साथ नहीं, बल्कि विभिन्न वर्षों में लागू होंगे। कुछ के लिए अक्टूबर 2027 की तारीख निर्धारित की गई है, जबकि अन्य 2028 और 2029 से लागू होंगे। इसके अलावा, कुछ प्रावधानों के लिए समय सीमा 2031 और 2032 तक रखी गई है, जिससे कार कंपनियों को अपनी गाड़ियों में आवश्यक बदलाव करने का पूरा समय मिलेगा.