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भारत में डेटा सेंटर की वृद्धि: डिजिटल इकोसिस्टम का आधार

भारत में डेटा सेंटर की क्षमता में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो डिजिटल इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है। 2020 में 375 मेगावाट से बढ़कर 2026 तक 1.57 गीगावाट होने की उम्मीद है। डेटा सेंटर ऑनलाइन सेवाओं की नींव हैं, जो सुरक्षित और प्रभावी तरीके से जानकारी को प्रोसेस करते हैं। सरकार ने इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें निवेश और मानकों का विकास शामिल है। जानें कि भारत कैसे डेटा सेंटर के जरिए डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है।
 

डेटा सेंटर का महत्व

इंटरनेट पर जो भी सामग्री उपलब्ध है, वह किसी न किसी सर्वर पर स्टोर होती है। ये सर्वर 24 घंटे सक्रिय रहते हैं, जिससे आपकी पसंदीदा वेबसाइट्स, ऐप्स और वीडियो की जानकारी तुरंत मिलती है। डेटा सेंटर इन सर्वरों का प्रबंधन करते हैं, और आपके हर 'क्लिक' के पीछे एक मजबूत ढांचा होता है, जिसमें भारी निवेश किया गया है.


भारत की डेटा सेंटर क्षमता

भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2020 में केवल 375 मेगावाट थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 1.57 गीगावाट होने की उम्मीद है। यह लगभग चार गुना वृद्धि है, और 2030 तक यह क्षमता 8 गीगावाट तक पहुंच सकती है.


डेटा सेंटर की आवश्यकता

जब आप UPI से भुगतान करते हैं या नेटफ्लिक्स पर कोई शो देखते हैं, तो डेटा सेंटर आपके लिए काम कर रहे होते हैं। ये सुरक्षित इमारतें हैं, जहां कंप्यूटिंग, स्टोरेज और नेटवर्किंग उपकरण होते हैं, जो डिजिटल जानकारी को स्टोर, प्रोसेस और ट्रांसफर करते हैं.


भारत की प्रगति

भारत का डिजिटल इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है, जिसके चलते कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा स्टोरेज की मांग भी बढ़ रही है। डेटा सेंटर इस मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना प्रदान कर रहे हैं.


एक क्लिक में प्रक्रिया

जब कोई यूजर ऐप खोलता है या डिजिटल रिक्वेस्ट भेजता है, तो सबसे पहले सुरक्षा प्रणाली उस रिक्वेस्ट की जांच करती है। इसके बाद, लोड बैलेंसर उसे किसी उपलब्ध सर्वर तक पहुंचाता है, और एप्लिकेशन सर्वर आवश्यक जानकारी की पहचान करता है. यह प्रक्रिया केवल 1-2 सेकंड में पूरी होती है.


भारत की तैयारी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डेटा सेंटर क्षमता में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस क्षेत्र में लगभग 70 अरब डॉलर का निवेश पहले से हो चुका है, और भविष्य में 90 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट आने की संभावना है.


नेशनल डेटा सेंटर का नेटवर्क

नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर ने दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किए हैं, जो सरकारी संस्थानों को 24/7 डिजिटल सेवाएं प्रदान करते हैं.


सरकार के प्रयास

सरकार ने डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि केंद्रीय बजट 2022-23 में डेटा सेंटरों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना, जिससे उन्हें आसानी से कर्ज मिल सके.


चुनौतियाँ

जैसे-जैसे डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ रही है, ऊर्जा और संसाधनों की मांग भी बढ़ रही है। 2031-32 तक डेटा सेंटरों की बिजली मांग 17 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसके लिए सरकार ग्रीन एनर्जी योजनाओं को लागू कर रही है.


जल प्रबंधन

सरकार डेटा सेंटरों में पानी के उपयोग को लेकर सतर्क है। जल शक्ति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, भूजल का उपयोग नियंत्रित किया जा रहा है.


निगरानी और मानक

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने डेटा सेंटर की दक्षता के लिए मानक तैयार किए हैं, जो ऊर्जा और जल संरक्षण के पहलुओं को कवर करते हैं.


भारत की स्थिति

भारत का डेटा सेंटर सेक्टर एक मजबूत और आत्मनिर्भर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रहा है, जो देश की डेटा संप्रभुता के लिए आवश्यक है.