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भारत में प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनियों का उदय: स्काईरूट और अन्य की सफलता

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्राइवेट निवेश को मंजूरी देकर एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया है, जो इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसके अलावा, 400 से अधिक स्टार्टअप्स ने स्पेस रिसर्च में अपनी पहचान बनाई है। इस लेख में हम स्काईरूट के साथ-साथ अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे अग्निकुल और गैलेक्स-आई की सफलता की कहानियों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे ये कंपनियां भारत को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं।
 

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र: प्राइवेट निवेश की नई दिशा

भारत, अमेरिका और चीन के बाद तीसरा ऐसा देश बन गया है जिसने अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र के निवेश को मंजूरी दी है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया है, जो प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद सफल रहा।


क्या आप जानते हैं कि भारत में 400 से अधिक स्टार्टअप्स को सरकार ने स्पेस रिसर्च में प्रोत्साहित किया है? ये कंपनियां क्या करती हैं, उनके उद्देश्य क्या हैं, और भविष्य की योजनाएं क्या हैं, इन सभी सवालों के जवाब जानने की जिज्ञासा लोगों में है। आइए, स्काईरूट के अलावा अन्य प्राइवेट कंपनियों के बारे में जानते हैं, जिनसे देश को बड़ी उम्मीदें हैं।


स्काईरूट एयरोस्पेस: एक नई शुरुआत

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) के दो पूर्व वैज्ञानिकों, पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने की थी। यह कंपनी छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए किफायती रॉकेट विकसित कर रही है। हैदराबाद में स्थित इस कंपनी की शुरुआत 2018 में हुई थी और इसने अब तक 99.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जो भारतीय रुपये में 800 करोड़ से अधिक है। इसके निवेशकों में GIC और टेमसेक जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।


भारत में प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनियों का प्रवेश

भारत ने 2023 में अपनी अंतरिक्ष नीति में बदलाव किया, जिससे प्राइवेट सेक्टर के लिए नए अवसर खुले। अब प्राइवेट कंपनियां लॉन्चिंग सेवाओं, स्पेस एप्लिकेशन और डाउनस्ट्रीम सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। 2014 तक केवल एक स्पेस कंपनी थी, जबकि अब 400 से अधिक स्टार्टअप्स इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।


स्टार्टअप से ऑर्बिट तक का सफर

भारत ने 2023 में अपनी स्पेस नीति में बदलाव किया, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्टेशन फंड (TAF) स्थापित किया है। 2021-22 में भारत का अंतरिक्ष बाजार 321 करोड़ रुपये का था, जो अब बढ़कर 3246 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


अग्निकुल: 3D प्रिंटेड रॉकेट का विकास

चेन्नई स्थित अग्निकुल कंपनी ने 75.5 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश प्राप्त किया है। यह कंपनी 3D प्रिंटेड इंजन और मोबाइल लॉन्चपैड के साथ कस्टमाइज्ड रॉकेट विकसित कर रही है। अग्निकुल कॉसमॉस ने 2026 में दो लॉन्च करने की योजना बनाई है और पहले ही श्रीहरिकोटा से 100 किलो और 300 किलोग्राम के पेलोट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।


गैलेक्स-आई: मल्टी-सेंसर इमेजिंग सैटेलाइट

बेंगलुरु की गैलेक्स-आई कंपनी मल्टी-सेंसर इमेजिंग सैटेलाइट विकसित कर रही है, जो हर मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें ले सकती है। इस कंपनी का बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक है और इसे IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने स्थापित किया है।


सैटश्योर और एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स

सैटश्योर, जो 2017 से अर्थ ऑब्जर्वेशन और AI आधारित एनालिटिक्स पर काम कर रही है, के पास 300 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग है। वहीं, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स टावर-माउंटेड एम्प्लिफायर, रडार और टेलीमेट्री यूनिट्स जैसे उपकरणों का निर्माण करती है।


भारत में प्राइवेट सेक्टर की संभावनाएं

सरकार की इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 और स्पेस टेक वेंचर कैपिटल फंड जैसी पहलों से इस क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फंडिंग, रिसर्च और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग जारी रहा, तो भारत जल्द ही वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकता है।