भारत में स्वदेशी फाइटर जेट इंजन निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारत में फाइटर जेट इंजन का निर्माण
भारत में लंबे समय से प्रयास हो रहा है कि देश में खुद के फाइटर जेट इंजन विकसित किए जा सकें। वर्तमान में, जो इंजन उपयोग में लाए जाते हैं, वे विदेशी कंपनियों द्वारा निर्मित होते हैं और भारत में केवल असेंबल किए जाते हैं। हाल ही में, रिलायंस और यूनाइटेड किंगडम की कंपनी Rolls Royce के बीच एक समझौता हुआ है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि भारत फाइटर जेट इंजन के आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिलायंस और रोल्स-रोयस का सहयोग
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोल्स-रोयस ने 14 अगस्त को घोषणा की कि वे मिलकर अडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के तहत एक स्वदेशी इंजन विकसित करने का इरादा रखते हैं। दोनों कंपनियां भारत में एक एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की योजना बना रही हैं, जहां इंजन के तकनीकी विकास, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और उत्पादन का कार्य किया जाएगा।
भविष्य की संभावनाएं
यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रोल्स-रोयस के पास इंजन निर्माण का व्यापक अनुभव है, जबकि रिलायंस के पास वित्तीय संसाधन और तकनीकी क्षमता है। इसे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान से भी जोड़ा जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से जेट इंजन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह अभी एक सैद्धांतिक समझौता है और ज्वाइंट वेंचर की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
भारत में फाइटर जेट इंजन निर्माण की चुनौतियां
भारत ने तेजस जैसे फाइटर जेट बनाने में सफलता प्राप्त की है, लेकिन अभी भी इसका इंजन स्वदेश में नहीं बनाया जा सका है। इसका कारण यह है कि फाइटर जेट इंजन के निर्माण के लिए उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री की आवश्यकता होती है, जैसे क्रिस्टल ब्लेड्स, लेजर ड्रिलिंग और हॉट-एंड कोटिंग्स। भारत इस तकनीकी क्षेत्र में पीछे है।
रोल्स-रोयस का परिचय
रोल्स-रोयस, जो मुख्य रूप से महंगी कारों के लिए जानी जाती है, जेट इंजन निर्माण में भी प्रसिद्ध है। यह कंपनी एयरक्राफ्ट के लेजर्स और एयरलाइन कंपनियों के लिए उत्पाद भी बनाती है और कई देशों की सेनाओं के लिए भी काम करती है। कुल मिलाकर, यह कंपनी 47 देशों में अपनी सेवाएं प्रदान करती रही है।