मदर डेयरी का अनोखा कदम: पर्यावरण के अनुकूल दूध पैकेट का लॉन्च
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नया कदम
भारत में बढ़ते प्लास्टिक कचरे और प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए मदर डेयरी ने एक अनोखा कदम उठाया है। कंपनी ने मंगलवार को देश का पहला ऐसा दूध पैकेट पेश किया है, जो उपयोग के बाद मिट्टी में स्वाभाविक रूप से गल जाएगा। इससे दूध के पैकेट से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे की समस्या में काफी कमी आएगी। मदर डेयरी का यह नया प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इस पहल की शुरुआत 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दिल्ली-एनसीआर से की जाएगी।
मदर डेयरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस नई तकनीक से बने दूध के पाउच का अनावरण किया। प्रारंभ में, कंपनी अपने गाय के दूध को इस पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग में बेचेगी। मदर डेयरी प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध विभिन्न राज्यों में वितरित करती है।
चार साल की मेहनत से तैयार हुआ पैकेट
कंपनी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने बताया कि इस विशेष पैकेट को विकसित करने में चार साल से अधिक का समय लगा। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य ऐसा पैकेजिंग समाधान तैयार करना था, जो उपयोग के बाद पर्यावरण में प्लास्टिक कचरा न छोड़े। यह पाउच सामान्य रूप से रीसाइक्लेबल रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर प्राकृतिक रूप से नष्ट भी हो सकेगा।
मदर डेयरी का कहना है कि इस नई पैकेजिंग में एक विशेष तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पैकेट धीरे-धीरे प्राकृतिक मोम में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव इस मोम को पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों में बदल देते हैं। इससे प्लास्टिक कचरे की समस्या में कमी आएगी और पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा।
उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मीनेश शाह ने कहा कि यह नया दूध का पैकेट कुछ वर्षों में मिट्टी में मिल जाएगा और पूरी तरह सड़कर समाप्त हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नई पैकेजिंग के कारण दूध की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं होगी। शाह ने कहा कि मदर डेयरी का यह कदम डेयरी क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल बनेगा और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, यह देश में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।