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वरुण धवन ने खेती में निवेश किया, मिट्टी की गुणवत्ता पर चिंता जताई

बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में खेती के लिए जमीन खरीदी और इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने मिट्टी की घटती गुणवत्ता और पोषक तत्वों की कमी पर चिंता जताई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की मिट्टी में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी है। सरकार ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इस लेख में जानें मिट्टी की गुणवत्ता में कमी के कारण और इसके समाधान के उपाय।
 

वरुण धवन का खेती में कदम

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने खेती के लिए जमीन खरीदने की जानकारी दी। वरुण ने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें उनकी खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने मिट्टी की घटती गुणवत्ता और प्राकृतिक पोषक तत्वों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:



जब मैं अपने खेत पर गया, तो किसानों ने बताया कि आजकल की मिट्टी में पहले जैसे पोषक तत्व नहीं हैं। बीजों में भी जिंक और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक तत्वों की कमी है। खेती में उपयोग होने वाले रसायन इन चीजों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह जानकर मुझे बहुत दुख हुआ कि हम यही खा रहे हैं। इससे मेरी नींद उड़ गई है। मैं खेती और उत्पादन से जुड़े लोगों से जानना चाहता हूं कि इसका समाधान क्या है। वरुण धवन, अभिनेता 



सरकारी आंकड़ों के अनुसार मिट्टी की स्थिति

खेत की मिट्टी की बात, क्या बताते हैं सरकारी आंकड़े?


भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय मृदा एवं भूमि उपयोग सर्वेक्षण ने 13 मार्च 2026 को मिट्टी का डेटा तैयार किया है। इस डेटा से पता चलता है कि भारत की मिट्टी में पोटैशियम की मात्रा तो ठीक है, लेकिन नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा विभिन्न स्थानों पर भिन्न है।


इसके अलावा, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में जिंक की कमी के रूप में देखी गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों द्वारा 2021 में किए गए अध्ययन में 2014 से 2020 के बीच 2,42,827 सतही मिट्टी के सैंपल का विश्लेषण किया गया, जिसमें 36.5% सैंपल में जिंक की कमी और 23.4% में बोरॉन की कमी पाई गई।


सरकार की पहलें

मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए क्या कर रही सरकार?


सरकार ने मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह देती है। इसके साथ ही, रासायनिक खाद के साथ जैविक स्रोतों का उपयोग करने की भी सिफारिश की गई है।


सरकार सॉइल हेल्थ एंड फर्टिलिटी स्कीम चला रही है, जिसके तहत किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड (SHCs) दिए जाते हैं। इसके माध्यम से किसानों को मिट्टी की सेहत के अनुसार रासायनिक खाद का सही मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी जाती है।


मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के कारण

किस कारण मिट्टी में कम हो रहे हैं पोषक तत्व?


मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के कई कारण हैं, जैसे खेती के तरीके, एक ही भूमि पर बार-बार फसल लेना, खाद का असंतुलित उपयोग, जैविक पदार्थों की कमी और मिट्टी का कटाव।


समाधान के उपाय

इसका समाधान क्या है?



  • मिट्टी की जांच कराएं और Soil Health Card का उपयोग करें।

  • संतुलित खाद का उपयोग करें, केवल यूरिया या DAP पर निर्भर न रहें।

  • जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं।

  • फसल के अवशेषों को खेत में मिलाएं।

  • फसल चक्र अपनाएं।

  • मिट्टी के कटाव से बचाव के उपाय करें।

  • माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का उपयोग करें।

  • रासायनिक और जैविक खाद का संतुलित उपयोग करें।


मिट्टी की जांच कराने का तरीका

मिट्टी की जांच कराने का तरीका भी जान लीजिए


भारत सरकार के सॉइल हेल्थ कार्ड के तहत मिट्टी की जांच कराई जा सकती है। इसके लिए नजदीकी कृषि विभाग या मृदा जांच प्रयोगशाला से संपर्क करें।


जांच के लिए 12 पैरामीटर देखे जाते हैं, जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम आदि।