व्यापारियों की अपील: कांग्रेस रैली की तारीख में बदलाव की मांग
CTI का पत्र राहुल गांधी के नाम
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक पत्र भेजा है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली कांग्रेस पार्टी की रैली को 10 नवंबर, भाई दूज के बाद, करने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि इस रैली के कारण त्योहारी सीजन में व्यापारियों को नुकसान हो सकता है.
त्योहारों का समय और व्यापार पर प्रभाव
व्यापारियों का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में धनतेरस, दिवाली और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहार हैं। ऐसे में रैली के कारण ट्रैफिक और भीड़भाड़ से व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस पत्र का कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.
CTI की चिंताएं
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल द्वारा 24 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस साल 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को भाई दूज है। व्यापारियों के लिए यह समय साल का सबसे व्यस्त और लाभकारी होता है। दिल्ली में धनतेरस के दिन अकेले लगभग 25,000 करोड़ रुपये का व्यापार होता है, जिसमें सोने-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, गाड़ियां और मिठाइयां शामिल हैं.
पिछले नुकसान की याद दिलाना
व्यापारियों ने यह भी बताया कि अक्टूबर में कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली में रास्तों के बंद होने और डायवर्जन के कारण उन्हें पहले ही लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
रैली का प्रभाव और बाजार
राहुल गांधी को भेजे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, करोल बाग और दरियागंज जैसे लगभग 20 बड़े थोक और रिटेल बाजार हैं। रैली के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन, मेट्रो स्टेशन बंद होने और बैरिकेडिंग से इन बाजारों में आने वाले ग्राहकों और व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.
यातायात और यात्रियों पर असर
पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के निकट होने के कारण त्योहारी सीजन में बाहर से आने वाले यात्रियों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें राजनीतिक रैलियों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वे चाहते हैं कि राहुल गांधी इस रैली की तारीख में बदलाव करें ताकि दिल्ली के व्यापारियों की कठिनाइयों को समझा जा सके.