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सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला: ज्यूडिशियल परीक्षाओं के लिए लीगल प्रैक्टिस की अवधि घटाई गई

सुप्रीम कोर्ट ने ज्यूडिशियल परीक्षाओं में भाग लेने के लिए लीगल प्रैक्टिस की अनिवार्य अवधि को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। यह निर्णय युवा वकीलों और कानून के छात्रों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। नए नियम के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को ज्यूडिशियल एकेडमी में प्रशिक्षण और एक साल की क्लर्कशिप करनी होगी। जानें इस महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में और क्या है इसके पीछे का कारण।
 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

यदि आप कानून की पढ़ाई करके सिविल जज बनने या ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय आपके लिए महत्वपूर्ण है। पहले, सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया था कि ज्यूडिशियल परीक्षाओं में भाग लेने के लिए कम से कम 3 साल की लीगल प्रैक्टिस आवश्यक है। अब, इस समय सीमा को घटाकर 1 साल कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि यदि आपने कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद एक साल की लीगल प्रैक्टिस की है, तो आप इन परीक्षाओं में भाग लेकर सिविल जज जैसे पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।


नए नियमों की जानकारी

मई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में कहा था कि ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षाओं में बैठने के लिए 3 साल की लीगल प्रैक्टिस अनिवार्य होगी। अब इसे घटाकर 1 साल कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयनित उम्मीदवारों को ज्यूडिशियल एकेडमी में प्रशिक्षण लेना होगा और इसके बाद 1 साल की क्लर्कशिप भी करनी होगी। हालांकि, यह छूट केवल उन भर्तियों के लिए मान्य है जो 1 अप्रैल 2027 से पहले आयोजित की जाएंगी.


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए जी मसीह और के विनोद चंद्रन ने इस पर सुनवाई की। इस बेंच ने 2:1 के बहुमत से निर्णय सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच नोटिफाई की गई परीक्षाओं पर भी यह नियम लागू होगा। चयनित अभ्यर्थियों को प्रारंभ में ट्रेनी न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा और उन्हें एक साल की क्लर्कशिप करनी होगी.


महत्वपूर्ण बदलाव

20 मई 2025 को, सुप्रीम कोर्ट ने कानून की डिग्री लेकर न्यायिक सेवा की परीक्षाओं में भाग लेने पर रोक लगा दी थी। तब यह तय किया गया था कि 3 साल की लीगल प्रैक्टिस अनिवार्य होगी। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अचानक इस नियम को लागू करने से युवा वकीलों और कानून की डिग्री धारकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, इसलिए यह बदलाव आवश्यक था। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2027 के बाद होने वाली भर्तियों के लिए पुराने नियम यानी 3 साल की प्रैक्टिस का नियम ही लागू रहेगा.