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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI के बेटों को आयकर मामले में झटका दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश योगेश कुमार सभरवाल के बेटों चेतन और नितिन सभरवाल को आयकर विभाग की जांच में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए आयकर विभाग द्वारा जारी नोटिस को सही ठहराया। यह मामला 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर संपत्ति खरीदने के लिए धन जुटाने से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये के शेयर सौदों पर टैक्स छूट का आरोप है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पीछे के कारण।
 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पूर्व मुख्य न्यायाधीश योगेश कुमार सभरवाल के दो बेटे, चेतन और नितिन सभरवाल, को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। कोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा चल रही जांच को सही ठहराते हुए उनके खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह मामला सिकंदरा रोड प्रॉपर्टी से संबंधित है।


मामले का विवरण

यह मामला 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर एक संपत्ति खरीदने के लिए धन जुटाने से जुड़ा है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने चेतन और नितिन द्वारा दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया और 2008-09 तथा 2009-10 के लिए जारी दोबारा असेसमेंट नोटिस को बरकरार रखा।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला पूर्व CJI वाईके सभरवाल के बेटों से संबंधित है, जिसमें करोड़ों रुपये के शेयर सौदों और उनसे प्राप्त धन पर टैक्स छूट का आरोप है। जांच में यह पाया गया कि 'पवन इम्पेक्स (पी) लिमिटेड' और 'एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर (पी) लिमिटेड' के शेयरों की कीमतें उनकी संपत्तियों की वास्तविक लागत से अधिक दर्शाई गई थीं।


शेयर बिक्री का समझौता

चेतन और नितिन ने अन्य शेयरधारकों के साथ मिलकर 'GYS रियल एस्टेट प्रा लि' के साथ शेयर बिक्री का समझौता किया था। इसमें पवन इम्पेक्स के 7.5 लाख शेयर 195 करोड़ रुपये और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर के 2.5 लाख शेयर 60 करोड़ रुपये में बेचे गए थे।


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आयकर विभाग को ठोस सबूत मिलते हैं कि किसी व्यक्ति की आय का सही आकलन नहीं हुआ है, तो विभाग दोबारा जांच कर सकता है। कोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा जारी नोटिस को सही ठहराया और कहा कि यह विभाग की जांच रिपोर्ट पर आधारित था।