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E20 पेट्रोल के खिलाफ टैक्सी ड्राइवरों का संसद मार्च, 4 अगस्त को होगा प्रदर्शन

दिल्ली में टैक्सी ड्राइवरों का एक बड़ा आंदोलन E20 पेट्रोल के खिलाफ शुरू होने जा रहा है। 4 अगस्त को होने वाले संसद मार्च में ड्राइवरों की प्रमुख मांगें हैं, जिसमें E20 नीति की समीक्षा और स्पीड लिमिट में ढील शामिल है। इस प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक बताया गया है। जानें इस आंदोलन के पीछे की वजहें और ड्राइवरों की चिंताएं।
 

दिल्ली में E20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी


नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र और जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन के समाप्त होने के बाद, अब इथेनॉल के खिलाफ एक नया आंदोलन शुरू होने जा रहा है। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) के उपयोग को लेकर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) टैक्सी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों में असंतोष बढ़ रहा है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ने E20 पेट्रोल की नीतियों, गाड़ियों की माइलेज में कमी और कड़े नियमों के खिलाफ 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है।


एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट और अन्य सदस्यों ने मीडिया के सामने ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को उजागर किया। इस दौरान वे विरोध के प्रतीक के रूप में हाथों में गन्ने थामे हुए थे।


E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों के इंजन पर असर


प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सम्राट ने E20 ईंधन को लेकर गाड़ियों के मालिकों और चालकों की मुख्य चिंताओं को साझा किया। देशभर के वाहन चालकों ने बताया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल वाले पेट्रोल के उपयोग से गाड़ियों का माइलेज घट गया है और इंजन के रखरखाव का खर्च बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि 2015 से पहले निर्मित अधिकांश वाहन इस मिश्रण के लिए अनुकूल नहीं हैं। जब लोग पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं, तो उन्हें मिलावटी पेट्रोल क्यों दिया जा रहा है?


एसोसिएशन ने इस नीति की एक निष्पक्ष और स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है, जिसमें वाहन मालिकों, उपभोक्ता अधिकार समूहों, वाहन निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।


स्पीड लिमिट और स्क्रैपेज नीति पर उठाए सवाल


एसोसिएशन के सदस्य जितेंद्र बॉबी ने कमर्शियल टूरिस्ट गाड़ियों के लिए 80 किमी प्रति घंटे की स्पीड लिमिट पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां प्राइवेट गाड़ियों को तेज रफ्तार से चलने की अनुमति है, वहीं ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) वाली कमर्शियल टैक्सियों और बसों पर 80 किमी/घंटे की पाबंदी है। इससे उनका व्यवसाय और ग्राहकों की संतुष्टि प्रभावित हो रही है।


ट्रांसपोर्टर्स की 6 प्रमुख मांगें


पहला E20 नीति की निष्पक्ष समीक्षा: इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी की स्वतंत्र तकनीकी और वैज्ञानिक जांच हो।


दूसरा पैनिक बटन और VLTD की जांच: गाड़ियों में अनिवार्य पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के नाम पर हो रही धांधली की ऑडिट/जांच कराई जाए।


तीसरा स्पीड लिमिट में ढील: टूरिस्ट कमर्शियल वाहनों के लिए 80 किमी/घंटे की स्पीड लिमिट पर पुनर्विचार किया जाए।


चौथा व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी पर विचार: पुरानी गाड़ियों को जबरन कबाड़ बनाने की नीति की समीक्षा हो।


पांचवीं BS-IV डीजल वाहनों से प्रतिबंध हटे: BS-IV डीजल टूरिस्ट वाहनों पर लगे प्रतिबंधों को सुधारा जाए।


छठी टोल टैक्स में राहत: नेशनल हाईवे पर वसूल किए जा रहे भारी-भरकम टोल टैक्स में कटौती की जाए।


प्रदर्शन रहेगा गैर-राजनीतिक


संजय सम्राट ने स्पष्ट किया कि 4 अगस्त को होने वाला संसद मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक होगा। उन्होंने कहा कि हमारा किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। यह विशुद्ध रूप से कमर्शियल वाहन चालकों और मालिकों के अस्तित्व की लड़ाई है। एसोसिएशन ने देश के अन्य टैक्सी, कैब और ट्रक यूनियनों से भी इस मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है, जिसमें हजारों ड्राइवरों के भाग लेने की उम्मीद जताई जा रही है।