ED ने धनशोधन मामलों में बनाया नया रिकॉर्ड, 81,000 करोड़ की संपत्ति कुर्क
नई दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी कार्रवाई से एक नया ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। धनशोधन के मामलों में, भले ही एजेंसी द्वारा की गई गिरफ्तारियों में लगभग 27 प्रतिशत की कमी आई हो, लेकिन कुर्क की गई संपत्तियों की संख्या ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस अवधि में ईडी ने 81,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके साथ ही, धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को भी एजेंसी ने हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति वापस दिलाकर राहत प्रदान की है।
छापों और मुकदमों की संख्या में वृद्धि
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत, ईडी ने देशभर में भ्रष्टाचारियों पर अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में, एजेंसी द्वारा किए गए छापों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 2,892 तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 1,491 थी। इसके साथ ही, मुकदमों की संख्या में भी तेजी आई है। पिछले वित्त वर्ष में जांच शुरू करने के लिए दर्ज की गई ईसीआईआर (ECIR) की संख्या 39 प्रतिशत बढ़कर 1,080 हो गई। इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप, ईडी ने इस दौरान रिकॉर्ड 812 आरोप पत्र अदालतों में दाखिल किए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा केवल 457 था।
गिरफ्तारियों में कमी का कारण
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईडी ने कुल 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 214 और 2023-24 में 272 थी। गिरफ्तारियों में 27 प्रतिशत की गिरावट का मुख्य कारण एजेंसी की जांच रणनीति में बदलाव है। अब ईडी अधिक 'लक्षित' और ठोस साक्ष्य-आधारित जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पीएमएलए के तहत जमानत मिलना कठिन होता है, इसलिए एजेंसी पुख्ता सबूत जुटाने के बाद ही गिरफ्तारी कर रही है।
पीड़ितों को लौटाए गए 32 हजार करोड़
संपत्ति जब्ती के मामले में, ईडी ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत किया है। एजेंसी ने 712 आदेशों के तहत 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जो पिछले वर्ष (30,036 करोड़) की तुलना में 171 प्रतिशत अधिक है। इसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों को अवैध धन का लाभ उठाने से रोकना है। इसके अलावा, धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों के लिए भी ईडी 'रॉबिनहुड' साबित हुई है। ईडी निदेशक राहुल नवीन ने इस साल 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति वापस दिलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन एजेंसी ने इसे दोगुने से भी अधिक पार करते हुए 32,678 करोड़ रुपये की संपत्तियां असली हकदारों और पीड़ितों को वापस लौटा दीं।