EVM की गिनती प्रक्रिया: क्या है इसकी पारदर्शिता और सुरक्षा?
विधानसभा चुनावों में सियासी हलचल
हाल ही में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुड्डूचेरी में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में छेड़छाड़ कर वोटों को अपने पक्ष में मोड़ रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस विवाद के बीच, एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या EVM को हैक किया जा सकता है और वोटों की गिनती कैसे होती है।
EVM और VVPAT की प्रक्रिया
चुनाव आयोग EVM का उपयोग करता है, जिसमें 2013 से VVPAT मशीन भी जोड़ी गई है, जो उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न छापकर एक कागजी पर्ची प्रदान करती है। मतगणना की जिम्मेदारी रिटर्निंग अधिकारी (RO) पर होती है। RO हर संसदीय क्षेत्र में चुनाव कराने और वोटों की गिनती की प्रक्रिया का संचालन करता है।
काउंटिंग हॉल में प्रक्रिया
काउंटिंग हॉल में विशेष व्यवस्था होती है। एक समय में एक विधानसभा क्षेत्र के वोटों की गिनती की जाती है। हर राउंड में 14 EVM मशीनों के वोटों की गिनती होती है, जिसकी निगरानी रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी करते हैं। उम्मीदवार अपने गिनती एजेंटों के साथ उपस्थित रह सकते हैं।
गिनती की प्राथमिकता
गिनती की प्रक्रिया में सबसे पहले पोस्टल बैलट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट की गिनती की जाती है, जिसे RO स्वयं देखता है। इसके आधे घंटे बाद EVM मशीनों की गिनती शुरू होती है। हर राउंड के बाद 14 EVM के परिणाम घोषित किए जाते हैं।
VVPAT पर्चियों की गिनती
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, हर संसदीय क्षेत्र में 5 पोलिंग स्टेशनों की VVPAT पर्चियों का मिलान किया जाता है। यह प्रक्रिया काउंटिंग हॉल में सुरक्षित VVPAT काउंटिंग बूथ में होती है। यदि EVM और VVPAT के परिणामों में कोई अंतर पाया जाता है, तो VVPAT की गिनती को अंतिम माना जाता है।
EVM में वोटों की गिनती
मतगणना के दिन सुबह 8 बजे चुनाव आयोग की निगरानी में वोटों की गिनती शुरू होती है। सभी EVM और कंट्रोल यूनिट को सील करके स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा कई स्तरों पर होती है, जिसमें CCTV और सुरक्षा बल शामिल होते हैं।
गिनती की प्रक्रिया
सुबह 8 बजे सबसे पहले पोस्टल बैलट और इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट की गिनती होती है। इसके बाद EVM की गिनती शुरू होती है। कंट्रोल यूनिट मुख्य मशीन होती है, जिसमें वोट दर्ज होते हैं। हर राउंड में 14 EVM की गिनती की जाती है।
नतीजों की घोषणा
जब काउंटिंग सेंटर पर सभी राउंड और VVPAT वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब रिटर्निंग अधिकारी फॉर्म 20 भरकर आधिकारिक नतीजे घोषित करते हैं। EVM की मेमोरी को फिर से सील कर दिया जाता है।
क्या EVM को हैक किया जा सकता है?
चुनाव आयोग इस बात को पूरी तरह से खारिज करता है। उनका कहना है कि भारत में मतदान की प्रक्रिया तेज, सस्ती और सुरक्षित है। पहले बैलट पेपर की गिनती में समय लगता था, लेकिन अब चुनावों के नतीजे एक ही दिन में आ जाते हैं। राजनीतिक दलों के एजेंट हर कदम पर मौजूद रहते हैं, और मीडिया भी इस प्रक्रिया पर नजर रखता है।