FCRA बिल पर भारत के राजदूत ने दी स्पष्टता, विदेशी फंडिंग पर उठे सवालों का किया जवाब
FCRA बिल पर विवाद और सरकार की स्थिति
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (FCRA) को लेकर विभिन्न दावे सामने आ रहे हैं। सरकार इस सत्र में इस बिल को पेश करने की योजना बना रही है। इस विधेयक का उद्देश्य विदेश से आने वाले धन का बेहतर प्रबंधन करना और फंड के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई थी। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई संस्थाओं और चर्चों के खिलाफ बताया और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए चिंता का विषय करार दिया। इसके बाद, भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और सिविल सोसायटी में चल रही चर्चाओं का स्पष्टीकरण दिया।
FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर स्पष्टीकरण
क्वात्रा ने बताया कि FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला कानून किसी विशेष धर्म या समुदाय को लक्षित करने के लिए नहीं है। उनका कहना था कि इस कानून का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना है। उन्होंने अमेरिका समेत अन्य देशों में लागू कानूनों का भी उल्लेख किया।
क्या भारत अकेला है इस तरह का कानून बनाने में?
क्वात्रा ने कहा कि यह गलत है कि भारत विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला अकेला देश है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में 1938 से FARA और 2010 में FATCA लागू है। ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में और कनाडा ने 2024 में विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े नियम बनाए हैं। ब्रिटेन की FIRS जुलाई 2025 में लागू होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ में भी इस दिशा में कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
धर्म को लेकर उठे सवालों का जवाब
क्वात्रा ने उन अफवाहों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि FCRA का उपयोग किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कानून सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे उनका संबंध किसी भी धर्म या विचारधारा से हो।
संपत्ति जब्त होने की अफवाह पर स्पष्टीकरण
एक और अफवाह यह थी कि NGO और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति जब्त की जा सकती है। क्वात्रा ने कहा कि यह गलत है कि कानून लागू होने के बाद संपत्तियों को सीधे जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, तो विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है।
सभी अफवाहों का जवाब
भारतीय राजदूत ने सभी अफवाहों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों से जुड़ी संपत्तियों के लिए अलग सुरक्षा का प्रावधान है। अगर किसी FCRA-रजिस्टर्ड संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है और उसने विदेशी फंड से किसी पूजा स्थल से जुड़ी संपत्ति बनाई है, तो उस संपत्ति को उसी धर्म की किसी दूसरी FCRA-रजिस्टर्ड संस्था को देने की व्यवस्था होगी।
क्या FCRA के कारण विदेशी फंडिंग में कमी आई है?
क्वात्रा ने कहा कि भारत में विदेशी फंड का प्रवाह कम नहीं हुआ, बल्कि बढ़ा है। उन्होंने बताया कि देश में 30 लाख से अधिक NGO हैं, लेकिन इनमें से केवल 14,450 के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। उन्होंने कहा कि FCRA किसी को विदेशी चैरिटी, रिसर्च ग्रांट या मानवीय सहायता लेने से नहीं रोकता।
बिल में प्रस्तावित बदलाव
सरकार इस बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव लाने की योजना बना रही है। इनमें से एक डेसिगनेटिड अथॉरिटी की व्यवस्था है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, तो विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों को इस अथॉरिटी के नियंत्रण में रखने का प्रावधान है। यदि संस्था बाद में अपना रजिस्ट्रेशन बहाल कर लेती है, तो उसके बचे हुए विदेशी फंड और संपत्तियां वापस किए जाने का प्रावधान है।
बिल पर विवाद का कारण
इस बिल को लेकर देश और विदेश में विरोध हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस बिल के जरिए विदेशी फंड को रोका नहीं जाएगा, बल्कि उसके उपयोग में पारदर्शिता आएगी। विपक्ष और कुछ NGO तथा धार्मिक संगठनों को चिंता है कि नए प्रावधानों से सरकार को विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि इस बिल को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिका में FCRA को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत विदेशी फंडिंग को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, बल्कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करना है।