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FSSAI की शराब कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी, नियमों का उल्लंघन पकड़ा गया

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने शराब बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें नियमों के उल्लंघन का उल्लेख है। FSSAI ने बताया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में अतिरिक्त फ्लेवर का उपयोग कर रही हैं और उम्र के बारे में भ्रामक जानकारी दे रही हैं। कंपनियों को जवाब देने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी गई है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो जुर्माना या अन्य कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
 

शराब कंपनियों पर सख्ती

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अब एनर्जी ड्रिंक्स के बाद शराब बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। FSSAI ने इन कंपनियों को नोटिस जारी किया है, जिसमें नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में अतिरिक्त फ्लेवर का उपयोग कर रही हैं और उत्पाद की उम्र के बारे में भ्रामक जानकारी दे रही हैं। इसके चलते FSSAI इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।


नोटिस का विवरण

FSSAI के अनुसार, यह नोटिस खाद्य सुरक्षा और मानक (मादक पेय पदार्थ) विनियम, 2018 के तहत नियमों के उल्लंघन के लिए जारी किया गया है। यह नोटिस लाइसेंस प्राप्त फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को दिया गया है। कंपनियों को इस नोटिस का जवाब देने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी गई है।


सोशल मीडिया पर जानकारी

FSSAI ने इस मामले की जानकारी अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की है। पोस्ट में कहा गया है कि शराब निर्माताओं को फ्लेवर मिलाने और उम्र से संबंधित भ्रामक दावों के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।


कंपनियों की जांच

FSSAI ने इन कंपनियों के उत्पादों की जांच की है, जिसमें पाया गया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में ऐसे सिंथेटिक फ्लेवर का उपयोग कर रही हैं, जो प्राकृतिक स्वाद और खुशबू की नकल करते हैं। FSSAI का कहना है कि इस तरह के अनधिकृत फ्लेवर का उपयोग नियमों का उल्लंघन है और इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गुमराह किया जाता है।


उम्र के दावों पर सवाल

FSSAI ने शराब की बोतलों पर उम्र के दावों पर भी सवाल उठाए हैं। कंपनियां अपनी बोतलों पर 8 से 12 साल पुरानी होने का दावा करती हैं, जबकि नियमों के अनुसार, यह दावा उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए। जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनियां बहुत कम मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को एज्ड बताकर अधिक कीमत पर बेच रही हैं।


आगे की कार्रवाई

FSSAI ने कंपनियों से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और पूछा है कि उनके खिलाफ FSS एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, यदि FSSAI इन कंपनियों के जवाब से संतुष्ट नहीं होती है, तो नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है या अन्य कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।