FSSAI ने चाय की पत्तियों में कीटनाशकों की सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव पेश किया
FSSAI का नया प्रस्ताव
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने हाल ही में चाय की पत्तियों में कीटनाशकों की अधिकतम मात्रा निर्धारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यदि चाय की पत्तियों में कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए जाते हैं, तो इसे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके तहत कार्रवाई की जा सकती है। FSSAI ने 16 अक्टूबर को एसेटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड नामक दो कीटनाशकों के अवशेष की अधिकतम सीमा तय करने के लिए एक मसौदा जारी किया है.
कीटनाशकों की अधिकतम सीमा
प्रस्ताव के अनुसार, एक किलो चाय की पत्तियों में एसेटामिप्रिड की मात्रा 20 मिलीग्राम और इमिडाक्लोप्रिड की मात्रा 50 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, ये नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। सरकार ने इस प्रस्ताव पर जनता से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जिन पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे.
चाय में कीटनाशकों का महत्व
एसेटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड ऐसे कीटनाशक हैं, जिनका उपयोग किसान फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए करते हैं। इनकी उपस्थिति चाय की पत्तियों पर अवशेष के रूप में रह सकती है, जो पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खत्म करने में मदद करती है। इसलिए, इनकी अधिकतम सीमा तय करना आवश्यक है, क्योंकि कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है.
अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) क्या है?
अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) वह मात्रा है, जो किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशक के अवशेष की कानूनी रूप से अनुमति होती है। इसे वैज्ञानिक आधार पर निर्धारित किया जाता है, जिसमें खाद्य पदार्थों में मौजूद कीटनाशकों के अवशेष और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है.
चाय उद्योग को संभावित लाभ
यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इससे चाय में कीटनाशकों की सीमा तय होने से किसानों, चाय उत्पादक कंपनियों और जांच प्रयोगशालाओं को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे। इसके अलावा, चाय की गुणवत्ता की जांच करना और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन कराना भी आसान हो सकता है, लेकिन इसके लिए पहले प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलनी आवश्यक है.